ग़ाज़ा: मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच व जवाबदेही के लिए कार्य जारी रखने का संकल्प

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने गुरूवार को ग़ाज़ा पट्टी में शान्ति योजना के लिए अन्तरराष्ट्रीय बोर्ड को स्थापित किया है. इस पृष्ठभूमि में, इसराइल-हमास युद्ध के दौरान वहाँ मानवाधिकार उल्लंघन के गम्भीर मामलों की जाँच के लिए गठित आयोग ने संकल्प जताया है कि सभी के लिए न्याय व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रयास जारी रहेंगे.

पूर्वी येरूशलम समेत क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े और इसराइल के लिए, मानवाधिकार परिषद ने स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के इस जाँच आयोग की नियुक्ति की थी.

आयोग के प्रमुख श्रीनिवासन मुरलीधर ने बताया कि ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की स्थापना, सुरक्षा परिषद में प्रस्तुत की गई उस योजना के तहत की गई है, जिस पर मतदान हुआ और उसे स्वीकार किया गया.

उन्होंने कहा कि “एक जाँच आयोग के रूप में, हम अपने दायित्व को मानवाधिकार उल्लंघनों की पड़ताल के रूप में देखते हैं. और हमारी समझ में यूएन ने हमें यही अधिदेश (mandate) को सौंपा है.”

यह जाँच आयोग, मानवाधिकार परिषद की शीर्ष व्यवस्थाओं में से है, जिसे 47 सदस्य देशों वाली परिषद ने मई 2021 में स्थापित किया गया था.

पिछले वर्ष नवम्बर में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ‘प्रस्ताव 2803’ पारित करके, ग़ाज़ा के पुनर्विकास की देखरेख और संक्रमणकालीन प्रशासन के लिए ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ की स्थापना का स्वागत किया था.

जनसंहार के आरोप

पिछले साल सितम्बर में, जाँच आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख नवी पिल्लै ने कहा था कि इसराइल ने ग़ाज़ा पट्टी में फ़लस्तीनियों के विरुद्ध जनसंहार को अंजाम दिया है.

अक्टूबर 2023 में, हमास व अन्य हथियारबन्द गुटों द्वारा किए गए आतंकी हमलों में इसराइल में लगभग 1,200 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद इसराइल ने ग़ाज़ा में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की. 

इसराइल ने जनसंहार के इस आरोप को सख़्ती से ख़ारिज किया है.

जाँच आयोग अध्यक्ष श्रीनिवासन मुरलीधर ने कहा कि दोनों क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघन मामलों की जाँच किए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग द्वारा पहले से की गई जाँच और निष्कर्ष से “न्यायिक प्रक्रिया में योगदान मिलेगा, ताकि इन दोनों क्षेत्रों के लोगों को स्थाई न्याय मिल सके.”

इस वर्ष के एजेंडा में, आयोग की योजना है कि सशस्त्र फ़लस्तीनी लड़ाकों द्वारा अन्य लोगों पर किए गए हमलों की भी जाँच की जाए. इसके साथ ही, उन्होंने दोहराया की यह जाँच आयोग अपना कामकाज स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाएगा.

मुख्य जाँचकर्ता ने बोर्ड ऑफ़ पीस को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस शान्ति योजना के ज़रिए, “युद्धरत क्षेत्र में रहने वाले सभी लोगों के हितों को साथ लेकर चला जाएगा.”

स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के पैनल ने जिनीवा में पत्रकारों के साथ बातचीत में बुधवार को ग़ाज़ा में इसराइली हवाई हमले में 3 फ़लस्तीनी पत्रकारों के मारे जाने की निन्दा की. आयोग की आयुक्त फ़्लोरेंस मुम्बा ने कहा, “जब आप किसी पत्रकार को जान से मार देते हैं, तो इसका अर्थ होता है कि आपके पास छिपाने के लिए कुछ है.”

UNRWA के विरुद्ध कार्रवाई की निन्दा

स्वतंत्र आयोग ने, क़ब्ज़े वाले पूर्वी येरूशलम में संयुक्त राष्ट्र की फ़लस्तीनी शरणार्थी सहायता एजेंसी UNRWA के मुख्यालय को भारी क्षति पहुँचाए जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

विशेषज्ञों ने ज़ोर देकर कहा कि पिछले कई दशकों से फ़लस्तीनियों को समर्थन देने में यूएन एजेंसी ने अहम भूमिका निभाई है.

मानवाधिकार विशेषज्ञ और आयोग के पूर्व  सदस्य क्रिस सिडोटी ने कहा, “इसराइल को, UNRWA द्वारा किए गए कार्य को ख़ारिज करने से पहले बहुत गम्भीरता से सोचना चाहिए… वह महत्वपूर्ण काम, जिसने इसराइल को उसकी ज़िम्मेदारियों से काफ़ी हद तक मुक्त किया है.”

“इससे मानवाधिकारों पर निश्चित रूप से गम्भीर परिणाम होंगे… बच्चों को शिक्षा का अधिकार है और सभी लोगों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का सर्वोच्च सम्भव स्तर पाने का अधिकार है.”

आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण पैनल, शस्त्र आपूर्ति और इसराइली बस्तियों के निवासियों की हिंसा की जाँच नहीं कर सका, जबकि यह मानवाधिकार परिषद से प्राप्त उनके अधिकार क्षेत्र में आता था.

उन्होंने कहा कि “वित्तीय संसाधन की कमी के कारण, हम इन क्षेत्रों में काम नहीं कर पाए.” 

Source: UN News

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *