किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज से सटे ऐतिहासिक दरगाहों पर कार्रवाई, संविधान, वक्फ क़ानून और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला: MYO

नई दिल्ली, 30 जनवरी 2026: मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया (MYO) किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ प्रशासन द्वारा परिसर से सटे सदियों पुराने दरगाहों और मज़ारों के विरुद्ध की जा रही एकतरफ़ा, मनमानी और गैर-कानूनी कार्रवाइयों पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध दर्ज कराती है। हालिया दिनों में हज़रत हाजी हरमैन शाह के आस्ताने में की गई तोड़फोड़ और अब हज़रत मखदूम शाह मीना के परिसर में स्थित पाँच सौ वर्ष से अधिक पुराने मज़ारों को ध्वस्त करने के लिए जारी नोटिस न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं, बल्कि यह भारत के संविधान और वक्फ क़ानून का खुला उल्लंघन भी हैं।

MYO के सह संयोजक डॉ शुजाअत अली क़ादरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति मे कहा कि ये दरगाहें और मज़ार कोई हालिया निर्माण नहीं हैं, बल्कि इनका ऐतिहासिक अस्तित्व सात सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। इसके विपरीत, किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 1912 में हुई थी। ऐसे में यह दुष्प्रचार करना कि दरगाहें कॉलेज परिसर में अवैध रूप से मौजूद हैं, न केवल तथ्यहीन है बल्कि समाज में नफ़रत और भ्रम फैलाने का सुनियोजित प्रयास है।

यह तथ्य रिकॉर्ड पर है कि कॉलेज की स्थापना के समय ही राजस्व विभाग द्वारा दरगाह की भूमि का अलग और स्पष्ट सीमांकन किया गया था, जो इस बात का ठोस प्रमाण है कि ये धार्मिक स्थल अपनी स्वतंत्र और वैध कानूनी पहचान रखते हैं। इसके बावजूद 26 अप्रैल 2025 को बिना किसी न्यायालयी आदेश और बिना किसी वैधानिक अनुमति के आस्ताना-ए-हज़रत हाजी हरमैन शाह की सीमा में स्थित वुज़ूख़ाना, इबादतगाह और ज़ायरीनों की सुविधाओं को ध्वस्त किया जाना एक गंभीर और निंदनीय क़ानून-विरोधी कृत्य है।

डॉ शुजाअत अली क़ादरी ने ज़ोर देकर कहा कि संबंधित भूमि वक्फ अधिनियम, 1995 के अंतर्गत विधिवत वक्फ संपत्ति है और सुन्नी वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। वक्फ क़ानून पूरी तरह स्पष्ट है कि वक्फ संपत्तियों से जुड़े किसी भी विवाद, हस्तक्षेप या कार्रवाई का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय को है। किसी शैक्षणिक संस्था या उसके अधिकारियों को इस प्रकार के नोटिस जारी करने या धमकीपूर्ण रवैया अपनाने का कोई अधिकार नहीं है।

मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति मानती है, जहाँ ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों को लेकर झूठे नैरेटिव गढ़कर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। यह न केवल अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों पर हमला है, बल्कि भारत की उस संवैधानिक भावना के भी विरुद्ध है, जो सभी नागरिकों को समान धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देती है।
MYO संबंधित प्रशासन से मांग करती है कि

  1. सभी ध्वस्तीकरण नोटिस तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाएँ।
  2. ध्वस्त किए गए धार्मिक ढाँचों की पुनर्बहाली सुनिश्चित की जाए।
  3. भविष्य में किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले न्यायालय की अनुमति को अनिवार्य बनाया जाए।

साथ ही, MYO वक्फ बोर्ड से भी यह अपेक्षा करती है कि वह केवल दर्शक न बने, बल्कि सक्रिय भूमिका निभाते हुए वक्फ संपत्तियों, प्राचीन दरगाहों और मज़ारों की समुचित पहचान, दस्तावेज़ीकरण और कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

डॉ शुजाअत अली क़ादरी ने कहा कि मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया यह स्पष्ट करती है कि वह संविधान के दायरे में रहते हुए हर उस कोशिश का लोकतांत्रिक और क़ानूनी तरीक़े से विरोध करेगी, जो धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और अल्पसंख्यक अधिकारों को कमज़ोर करने की दिशा में की जाएगी।

जारीकर्ता:
डॉ शुजाअत अली क़ादरी (सह संयोजक)
मुस्लिम यूथ ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इंडिया (MYO)

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