फैक्ट चेक: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम से वायरल ‘रेप दोषियों के एनकाउंटर या फांसी’ वाला पोस्टकार्ड फर्जी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम से जुड़ा एक पोस्टकार्ड तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस पोस्टकार्ड के ज़रिए दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति ने बलात्कारियों को लेकर बेहद सख़्त टिप्पणी की है।

फेसबुक पर Ancient Bharat नाम के यूज़र ने यह पोस्ट साझा करते हुए लिखा, की “राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने कहा— अब बलात्कारियों का या तो एनकाउंटर होगा या बीच चौराहे पर फांसी। कौन-कौन इस फैसले से सहमत है?

इस दावे के वायरल होने के बाद Times Headline ने इसकी सत्यता की जांच की।

फैक्ट चेक

Times Headline की टीम ने वायरल पोस्टकार्ड और उससे जुड़े दावे की गहराई से जांच के लिए सबसे पहले गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स को गूगल रिवर्स इमेज सर्च किया, लेकिन किसी भी विश्वसनीय मीडिया संस्थान, सरकारी बयान या आधिकारिक रिपोर्ट में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ऐसा कोई बयान दिए जाने की पुष्टि नहीं मिली।

इसके अलावा, वायरल पोस्टकार्ड में दिखाई दे रही कुर्सी पर भी ध्यान पर सामने सामने आया कि यह कुर्सी लोकसभा स्पीकर की कुर्सी से मिलती-जुलती है, जबकि राष्ट्रपति के आधिकारिक संबोधनों में प्रयुक्त कुर्सी इससे अलग होती है।

संसद अभिभाषण की भी जांच

गौरतलब है कि 28 जनवरी 2026 को संसद का बजट सत्र शुरू हुआ था, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया था। Times Headline ने President of India की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध राष्ट्रपति के पूरे अभिभाषण को खंगाला, लेकिन वहां भी रेप दोषियों के एनकाउंटर या सार्वजनिक फांसी से जुड़ा कोई बयान नहीं मिला।

असली पोस्टकार्ड क्या कहते हैं?

आगे की जांच में News18 और Delhi Chronicle के वास्तविक पोस्टकार्ड सामने आए, जिनमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हवाले से कहा गया है — “जी राम जी अधिनियम से गांवों के विकास को नई गति मिलेगी, भ्रष्टाचार रुकेगा।

इससे स्पष्ट होता है कि वायरल पोस्टकार्ड को एडिट या गढ़ा गया है और राष्ट्रपति के नाम से झूठा बयान जोड़ा गया है।

निष्कर्ष

Times Headline की फैक्ट-चेक जांच में यह पूरी तरह साफ़ हो गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रेप दोषियों के एनकाउंटर या बीच चौराहे पर फांसी को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा दावा भ्रामक और फर्जी है।

यूज़र्स से अपील है कि किसी भी वायरल पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सच्चाई ज़रूर जांच लें।

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