मध्य पूर्व: ‘लेबनान को व्यापक क्षेत्रीय टकराव में घसीटा गया’, हमले रोकने का आग्रह

राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों के लिए यूएन की शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि हिज़बुल्लाह द्वारा 2 मार्च को इसराइल पर हमले किए जाने और उसके बाद इसराइली सैन्य कार्रवाई ने, मध्य पूर्व में भड़के संकट में लेबनान को भी खींच लिया है. नए सिरे से हो रही हिंसा, विस्थापन की वजह से वर्ष 2024 में हिंसक टकराव पर विराम के बाद दर्ज की गई प्रगति धूमिल हो गई है.

मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बुधवार को न्यूयॉर्क में एक बैठक बुलाई गई, जिसमें लेबनान में हिंसक टकराव और गहराते संकट पर चर्चा हुई. 

यह आपात बैठक, फ़्राँस के साथ बहरीन, डेनमार्क, ग्रीस, लातविया और ब्रिटेन के अनुरोध पर हुई है. 

28 फ़रवरी को ईरान पर इसराइली व अमेरिकी हवाई हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में भड़के भीषण टकराव ने इस क्षेत्र के अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसमें लेबनान भी है.

यूएन अवर महासचिव रोज़मैरी डीकार्लो ने 15 सदस्य देशों वाली सुरक्षा परिषद को बताया कि हिज़बुल्ला ने 2 मार्च को इसराइल पर हमले किए, जिसके बाद लेबनान को भी टकराव में घसीट लिया गया.

उसके बाद से, इसराइल और क़ाबिज़ सीरियाई गोलन क्षेत्र को निशाना बनाकर सैकड़ों रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन दागे जा चुके हैं, जोकि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का उल्लंघन है.

वर्ष 2006 के बाद से, इस प्रस्ताव को लेबनानी और इसराइली नागरिकों को हिंसा से बचाने के लिए अन्तरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त एक अहम उपाय माना जाता है.

प्रगति पर चोट

इसके बाद, लेबनान में इसराइली बलों की दक्षिणी बेरूत, दक्षिणी लेबनान और बेका क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई में अब तक 570 लोगों के मारे जाने और 1,400 के घायल होने की ख़बर है.

7 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं. इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिज़बुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है और लोगों को जगह छोड़कर चले जाने के आदेश दिए हैं.

अवर महासचिव डीकार्लो ने कहा कि इसराइल और हिज़बुल्ला के बीच नवम्बर 2024 में हिंसक टकराव थमने के बाद जो भी प्रगति हुई है और उस पर पानी फेर दिया गया है.

उन्होंने इसराइल से लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई को रोकने, लेबनान के इलाक़ों से अपने सुरक्षा बलों को वापिस बुलाने और देश की सम्प्रभुता का सम्मान करने का आग्रह किया है.

साथ ही, राजनैतिक एवं शान्तिनिर्माण मामलों की प्रमुख ने हिज़बुल्लाह से इसराइल पर हमले रोकने और लेबनान सरकार के प्रयासों में सहयोग करने की अपील की है ताकि हथियारों पर राज्यसत्ता का नियंत्रण हो सके.

“लेबनान और इसराइल, दोनों की सम्प्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को सर्वोपरि रखा जाना होगा.”

विस्थापन से गहराया संकट

आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय (OCHA) प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने जिनीवा से एक वीडियो लिंक के ज़रिए सुरक्षा परिषद को सम्बोधित किया.

उन्होंने चिन्ता जताई कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में हिंसा ज़ोर पकड़ रही है और लेबनान में मानवीय स्थिति तेज़ी से बिगड़ती जा रही है. 

अवर महासचिव फ़्लैचर ने बताया कि 7.5 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, जिनकी एक बड़ी संख्या भीड़भाड़ वाले केन्द्रों पर आश्रय की तलाश में है.

विस्थापित परिवारों को शरण देने के लिए स्कूलों को बन्द किया जा रहा है, स्वास्थ्य केन्द्रों में कामकाज पर असर हो रहा है और मानवीय सहायता आवश्यकताओं में उछाल आया है. 

OCHA प्रमुख ने चेतावनी दी है कि आश्रय की पर्याप्त व्यवस्था न होने और भीड़ बढ़ने से बीमारी, शोषण व हिंसा को जोखिम बढ़ेगा.

इन परिस्थितियों के मद्देनज़र, संयुक्त राष्ट्र ने अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर ज़रूरतमन्द लोगों के लिए भोजन, जल, ईंधन और मेडिकल सेवाओं की व्यवस्था की है.

यूएन अवर महासचिव टॉम फ़्लैचर ने मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए तीन अहम प्राथमिकताओं पर बल दिया है:

  • आम नागरिकों और अस्पतालों, स्कूलों, जल प्रणालियों, मानवीय सहायताकर्मियों समेत बुनियादी प्रतिष्ठानों की रक्षा 
  • लेबनान और वृहद मध्य पूर्व क्षेत्र में मानवीय सहायता प्रयासों के लिए बड़े स्तर पर अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय समर्थन
  • अस्थिरता दूर करने, हिंसा पर विराम लगाने और तनाव में कमी लाने के लिए नए सिरे से कूटनैतिक प्रयास

यूएन मिशन जुटा सहायता प्रयासों में

यूएन शान्तिरक्षा विभाग के प्रमुख ज्याँ पिएर लाक्रोआ ने सुरक्षा परिषद को बताया कि हिंसक टकराव में आई तेज़ी के बावजूद, यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNIFIL) की ज़मीन पर उपस्थिति बनी हुई है. 

उन्होंने कहा कि हिज़बुल्ला और इसराइली सैन्य बलों के बीच, मार्च के शुरुआती दिनों से ही हर रोज़ गोलाबारी, ड्रोन, मिसाइल व रॉकेट हमले हो रहे हैं.

यूएन मिशन के अनुसार, इसराइली सैनिकों द्वारा लेबनान और इसराइली बलों को अलग करने वाले ‘ब्लू लाइन’ को पार किया गया है, जिससे सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1701 का उल्लंघन होने और अस्थिरता बढ़ने का जोखिम है.

बिगड़ती स्थिति के बीच, यूएन शान्तिरक्षक दक्षिणी लेबनान में स्थानीय समुदायों को मदद पहुँचाने में जुटे हैं और अनेक गाँवों को छोड़कर जा रहे आम नागरिकों के लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की गई है.

यूएन शान्तिरक्षकों की सुरक्षा के लिए जोखिम भी बढ़े हैं. इसी महीने, घाना का एक शान्तिरक्षक, यूएन के ठिकाने पर हुई गोलाबारी में घायल हो गया था. आवाजाही में कठिनाई की वजह से अधिकाँश शान्तिरक्षक, अपने शिविर तक सीमित हैं, और गश्त व निगरानी क्षमता कम कर दी गई हैं.

Source : UN News hindi

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