संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर इसराइल ने बुधवार को लेबनान में जिस तेज़ी से भीषण हवाई हमले किए, उनसे बड़े पैमाने पर विध्वंस हुआ है और सैकड़ों लोग हताहत हुए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक शीर्ष अधिकारी ने चेतावनी दी है कि पहले से ही नाज़ुक स्थिति में पहुँच चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था, स्थानीय लोगों को सेवाएँ मुहैया कराने के लिए संघर्ष कर रही है.
लेबनान में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दीनासिर अबूबकर ने बेरूत से यूएन न्यूज़ को बताया कि बुधवार, देश में मौजूदा हिंसक टकराव के लिए अब तक के सबसे घातक दिनों में साबित हुआ.
राजधानी बेरूत और अन्य शहरों में कुछ ही मिनटों के भीतर, घनी आबादी वाले इलाक़ों में दोपहर के समय अनेक हमले किए गए.
“केवल 10 मिनटों में, कल दोपहर, अनेक स्थानों पर धमाके हुए, जिनमें राजधानी बेरूत के घनी आबादी वाले इलाक़े भी हैं.” बिना किसी पूर्व चेतावनी के हुए इन हमलों के बाद, अपने दैनिक कार्यों में जुटे आम नागरिकों की चीख-पुकार सुनाई दी.
उन्होंने बताया कि इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं, 200 से अधिक मौतें और एक हज़ार से अधिक घायल, जिनमें महिलाएँ व बच्चे भी हैं.
डॉक्टर अबूबकर के अनुसार, मृतकों व घायलों में अग्रिम पंक्ति के राहतकर्मी और स्वास्थ्य देखभालकर्मी भी हैं, और अब भी अनेक लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं.
उन्होंने इस हमले को भयावह, बहुत दुखद और चिन्ताजनक क़रार देते हुए कहा कि बेरूत में अपने कार्यालय से अनेक हमलों को होते हुए देखा. “मैं अपनी खिड़की से देख सकता था, असल में, मेरे सामने 10 अलग-अलग विस्फोट हुए हैं और इमारतें धराशायी हो गईं.”
अस्पताल, दरकने के कगार पर
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, देश भर में अस्पतालों पर भीषण दबाव है, विशेष रूप से आपात स्वास्थ्य सेवाओं व घायलों के इलाज के लिए देखभाल व्यवस्था पर. महत्वपूर्ण चिकित्सा सामग्री की क़िल्लत, इस संकट को और जटिल बना रही है.
उन्होंने कहा कि अस्पतालों ने इन कमियों को दूर करने के लिए एक त्वरित अपील जारी की है और पूरे देश में सामूहिक हताहतों के लिए प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए गए हैं.
शवों की शिनाख़्त
डॉक्टर अबूबकर ने इस हमले की भयावहता को बयाँ करते हुए कहा कि अस्पतालों में अब भी ऐसे शवों की जानकारी मिल रही है, जिनकी शिनाख़्त नहीं हो पाई है, और बरामद किए गए शरीर के अंगों की.
स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर हमले जारी रहने से स्वास्थ्य प्रणाली पर भी दबाव बढ़ा है, और लेबनान में हिंसक टकराव भड़कने के बाद से अब तक 50 से अधिक चिकित्साकर्मी मारे जा चुके हैं और 150 से ज़्यादा घायल हुए हैं.
बीते लगभग 40 दिनों से जारी हिंसक टकराव के कारण अनेक देखभालकर्मी, लड़ाई की चपेट में आने से स्वयं विस्थापन का शिकार हुए थे.
सीमित पहुँच

डॉक्टर अबूबकर ने क्षोभ जताया कि इन हमलों से न केवल लोगों की ज़िन्दगियाँ ख़त्म हुई हैं, बल्कि ज़रूरतमन्दों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचा पाना भी कठिन साबित हो रहा है.
स्वास्थ्यकर्मियों के हताहत होने से अग्रिम पंक्ति के राहतकर्मियों और ऐम्बुलेंस सेवा पर असर हो रहा है, जिससे पहले से ही नाज़ुक स्थिति का सामना कर रहे समुदायों की कठिनाई बढ़ी है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी अपने साझेदार संगठनों और लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर, प्रभावित लोगों तक मेडिकल सामान की आपूर्ति, तकनीकी सहायता व अन्य मदद मुहैया कराने में जुटी है. हालांकि, संसाधनों की बड़ी क़िल्लत महसूस की जा रही है.
WHO प्रतिनिधि के अनुसार, बीते 40 दिनों में पहले से मौजूद सामान अब ख़त्म होता जा रहा है.
समर्थन की अपील
डॉक्टर अबबूकर ने कहा कि लॉजिस्टिक कारणों से मेडिकल सामान की आपूर्ति के प्रयासों में भी बाधाएँ पेश आ रही हैं, और देश तक परिवहन के सीमित विकल्प हैं. इसलिए, यहाँ तक चिकित्सा सामान लाने के लिए वैकल्पिक उपाय सोचे जाने होंगे.
इन चुनौतियों के बावजूद, लेबनान में स्वास्थ्य प्रणाली अब भी सक्रिय है और लोगों को सेवाएँ मुहैया कराने और जीवनरक्षा के लिए हरसम्भव कोशिशें की जा रही हैं.
मगर, मानवीय सहायता, यूएन एजेंसी और साझेदार संगठनों को हासिल होने वाले उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगी, और इसके लिए अन्तरराष्ट्रीय समर्थन की आवश्यकता है.
“हमें जल्द से जल्द संसाधन और धनराशि की आवश्यकता है, ताकि काम को जारी रखा जा सके और ज़रूरतमन्दों तक मदद पहुँचाई जा सके.” इसके अभाव में, जीवनरक्षा अभियानों पर जोखिम होगा.
Source : UN News
