नई दिल्ली: देश की राजनीति में विपक्षी एकजुटता को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सोमवार को नई दिल्ली में INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में शामिल विपक्षी दलों ने एकजुट होकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का संकल्प लिया। साथ ही भाजपा का मुकाबला करने के लिए साझा रणनीति बनाने पर भी ज़ोर दिया गया।
हालांकि बैठक में विपक्षी एकता का संदेश देने की कोशिश की गई, लेकिन गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद भी साफ़ तौर पर दिखाई दिए। आम आदमी पार्टी और डीएमके जैसे प्रमुख सहयोगी दल बैठक से दूर रहे, जबकि कुछ अन्य दलों ने भी कांग्रेस के साथ अपने मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा।
25 दलों की मौजूदगी, पांच अहम मुद्दों पर बनी सहमति
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि INDIA गठबंधन की बैठक में 25 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि सभी दलों के बीच पांच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है।
सबसे पहले, विपक्षी दलों ने एसआईआर, मतदाता सूची में कथित हेरफेर और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों पर चिंता जताई। इस मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को जल्द पत्र भेजने का निर्णय लिया गया।
दूसरा बड़ा फैसला शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर रहा। खड़गे ने कहा कि नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लाखों छात्रों का भरोसा टूटा है और उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ा। इसी को देखते हुए गठबंधन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने का फैसला किया है।
इसके अलावा गठबंधन ने देश की आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाने का निर्णय लिया। इन विषयों पर केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी की जाएगी।
संसद से सड़क तक साझा रणनीति
मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि INDIA गठबंधन केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे भी लगातार समन्वय बनाए रखेगा। इसके तहत हर दूसरे महीने गठबंधन की बैठक आयोजित की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि संसद के मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए हर सुबह लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ सभी विपक्षी दलों की बैठक होगी, ताकि सदन के भीतर साझा रणनीति के साथ सरकार को घेरा जा सके।
कौन-कौन नेता बैठक में हुए शामिल?
बैठक में कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे मौजूद रहे। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इसमें भाग लिया।
इसके अलावा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्लाह, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती तथा वामपंथी दलों के कई नेता बैठक में शामिल हुए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, सीपीएम के जॉन ब्रिटास और सीपीआई के डी. राजा भी बैठक में मौजूद रहे। वहीं शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
तृणमूल कांग्रेस की मौजूदगी पर भी रही चर्चा
बैठक ऐसे समय में हुई जब तृणमूल कांग्रेस खुद राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। बैठक की तैयारियों के बीच पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु रे ने राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद पार्टी के कई सांसदों के इस्तीफा देने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी का बैठक में शामिल होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डीएमके ने दूरी क्यों बनाई?
बैठक से सबसे ज़्यादा चर्चा डीएमके की गैरमौजूदगी को लेकर हुई। डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलनगोवन ने साफ़ कहा कि कांग्रेस अब उनके साथ नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस तमिलनाडु में टीवीके के साथ आगे बढ़ रही है और भविष्य में स्थानीय निकाय तथा लोकसभा चुनाव भी उसी गठबंधन के साथ लड़ने की बात कर रही है। ऐसे में डीएमके के लिए INDIA गठबंधन की इस बैठक में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं था। इसके अलावा डीएमके का यह बयान गठबंधन के भीतर बढ़ती असहजता और क्षेत्रीय स्तर पर बदलते राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करता है।
सीपीएम ने भी जताई नाराज़गी
हालांकि सीपीएम बैठक में शामिल हुई, लेकिन उसने भी कांग्रेस के प्रति अपनी नाराज़गी छिपाई नहीं। सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने कहा कि INDIA गठबंधन में शामिल सभी दलों को अधिक गंभीरता और स्पष्ट उद्देश्य के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने सीपीआई(एम) और एलडीएफ पर भाजपा के साथ समझौते जैसे बेबुनियाद आरोप लगाए थे। एमए बेबी के अनुसार, गठबंधन के प्रमुख दल द्वारा अपने ही सहयोगियों पर ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है और इससे आपसी विश्वास प्रभावित होता है।
2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव पर अखिलेश की नज़र
बैठक से पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि INDIA गठबंधन की रणनीति केवल वर्तमान राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी नज़र 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर भी है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की रक्षा ज़रूरी है। उनका दावा था कि राज्य में जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए गठबंधन भविष्य की रणनीति तैयार कर रहा है।
तेजस्वी यादव ने उठाया चुनावी प्रक्रिया का मुद्दा
बैठक में शामिल होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं तो भाजपा कहीं नहीं टिकेगी। उनके इस बयान को चुनावी पारदर्शिता को लेकर विपक्ष की चिंताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा का पलटवार
INDIA गठबंधन की बैठक पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वोट चोरी नहीं हुई है, बल्कि विपक्षी दलों का वजूद चोरी हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष विभिन्न राज्यों में अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार अलग-अलग बातें करता है और जनता अब इस राजनीति को समझ चुकी है।
एकनाथ शिंदे ने गठबंधन की एकता पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने INDIA गठबंधन को अहंकारी बताते हुए कहा कि विपक्षी दल लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते रहते हैं, लेकिन उनके पास न तो एकता है और न ही कोई गंभीर राजनीतिक दिशा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी, डीएमके और टीवीके जैसे दल बैठक में शामिल नहीं हुए। उनके अनुसार कई दलों को अब यह लगने लगा है कि INDIA गठबंधन के साथ बने रहने से राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
शिंदे ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस छोटे दलों को कमजोर कर खुद को एकमात्र विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित करना चाहती है।
भाजपा नेता वी. मुरलीधरन की टिप्पणी
भाजपा नेता वी. मुरलीधरन ने भी गठबंधन की स्थिरता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन ऐसा सिस्टम बन गया है जो कभी चालू होता है और कभी बंद। उनके अनुसार फिलहाल गठबंधन सक्रिय दिखाई दे रहा है, लेकिन यह स्थिति कितने समय तक बनी रहेगी, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विपक्षी एकता के दावे और अंदरूनी चुनौतियाँ
नई दिल्ली में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना था। बैठक में लोकतंत्र, चुनावी पारदर्शिता, बेरोज़गारी, महंगाई और किसानों के मुद्दों पर एकजुटता दिखाई गई।
लेकिन दूसरी ओर डीएमके की अनुपस्थिति, कांग्रेस और सीपीएम के बीच तनाव तथा गठबंधन के भीतर उभर रहे क्षेत्रीय मतभेद यह भी संकेत देते हैं कि विपक्षी एकता की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं है।
ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि INDIA गठबंधन अपने साझा एजेंडे को कितनी मजबूती से आगे बढ़ा पाता है और अपने भीतर मौजूद मतभेदों को किस हद तक सुलझा पाता है।
