गौ तस्करी के शक में बर्बर भीड़ ने ली थी जान, 14 दोषियों को उम्रकैद; नर्मदापुरम कोर्ट ने कहा- यह मॉब लिंचिंग थी

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में करीब चार साल पहले गौ तस्करी के शक में हुई एक बर्बर हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। नर्मदापुरम की एक सेशंस कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के इस मामले में 14 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

यह मामला अगस्त 2022 का है, जब महाराष्ट्र के अमरावती निवासी नजीर अहमद की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

नर्मदापुरम की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज तबस्सुम खान ने 12 जून को फैसला सुनाते हुए दीपक उर्फ बाबा केवट, अज्जू उर्फ अजय राठौड़, प्रकाश कौशल, चेतन मराठा, पवन बाथव, अमर उर्फ भोला बाथव, कन्हैया बाथव, देवेन्द्र उर्फ छोटू कोरी, संदीप उर्फ राजा कौशल, अनुज उर्फ बल्लू रघुवंशी, संजू उर्फ राजेंद्र कौशल, आकाश उर्फ पिंटोली बाथव, गौरव यादव और आकाश सराठे को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 341, 148, 307/149 और 302/149 के तहत दोषी ठहराया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने साफ कहा कि आरोपियों ने गैर-कानूनी भीड़ बनाकर मॉब लिंचिंग की। कोर्ट ने माना कि हमलावर घातक हथियारों से लैस थे और उन्होंने नजीर अहमद के साथ बेहद बेरहमी से मारपीट की, जिसके कारण उनकी मौत हो गई।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 2-3 अगस्त 2022 की रात ट्रक ड्राइवर शेख लाला, नजीर अहमद और शेख मुश्ताक के साथ मवेशियों को नंदरवाड़ा से महाराष्ट्र ले जा रहे थे। इसी दौरान सिवनी मालवा के बाराखाड़ गांव के पास ग्रामीणों के एक समूह ने ट्रक को रोक लिया और उसमें सवार लोगों पर लाठियों और डंडों से हमला कर दिया।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से खून के नमूने जुटाए, गवाहों के बयान दर्ज किए और पीड़ित का मृत्यु से पहले दिया गया बयान भी रिकॉर्ड किया। अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर माना कि आरोपियों ने एक समान उद्देश्य के तहत हमला किया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नजीर अहमद के सिर और शरीर पर कई गंभीर चोटों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी खोपड़ी टूट गई थी और शरीर पर कई जगह गहरी चोटें थीं। अदालत ने मेडिकल सबूतों के आधार पर बचाव पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि मौत का हमले से कोई संबंध नहीं था।

हालांकि, अदालत ने दोषियों को फांसी की सजा देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मृत्युदंड केवल ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ मामलों में ही दिया जाना चाहिए। इसके बाद सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

फैसले के बाद कोर्ट परिसर के बाहर भावुक दृश्य देखने को मिले। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोषियों के परिजन बड़ी संख्या में वहां जमा हो गए। जब पुलिस दोषियों को जेल ले जाने लगी, तो कुछ रिश्तेदारों ने पुलिस वाहन को रोकने की कोशिश की और कुछ लोग गाड़ी के आगे लेट गए। परिजनों का कहना था कि उनके बच्चे गौ सेवा और गौ रक्षा के लिए गए थे, लेकिन अब उन्हें इस घटना का नतीजा भुगतना पड़ रहा है।

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