होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाज़ों पर नए हमलों के बाद बुधवार को ऊर्जा बाज़ारों में फिर बेचैनी फैल गई.इस बीच, अन्तरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने सभी पक्षों से “अधिकतम संयम बरतने और तनाव कम करने” की अपील की है.
हमलों में ईरानी ठिकानों के अलावा तीन व्यापारी जहाज़ों को भी निशाना बनाए जाने की ख़बरें हैं. IMO महासचिव आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने पिछले दो दिनों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़र रहे कई जहाज़ों पर हुए “लापरवाह हमलों” की निन्दा की है.
उन्होंने कहा कि यह संकरा जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है और यहाँ किसी भी तरह का व्यवधान व्यापक असर डाल सकता है.
विशाल जोखिम
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि पिछले 24 घंटों में अमेरिका और ईरान के बीच हमलों और जवाबी हमलों का फिर शुरू होना “चिन्ताजनक” है. उन्होंने चेतावनी दी कि इससे अप्रैल में युद्धविराम ढाँचे पर सहमति के बाद हुई कूटनैतिक प्रगति पटरी से उतर सकती है.
यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा, “पूर्ण स्तर पर हिंसक टकराव की वापसी के क्षेत्र के लोगों, अन्तरराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा और समूची वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे.”
IMO महासचिव आरसेनियो डोमिन्गवेज़ ने भी नाविकों की सुरक्षा पर गहरी चिन्ता जताई.
उन्होंने कहा, “इन लापरवाह हमलों ने एक बार फिर निर्दोष नाविकों को गम्भीर ख़तरे में डाल दिया है. किसी भी नाविक की जान केवल इसलिए जोखिम में नहीं पड़नी चाहिए कि वह अपना काम कर रहा है.”
IMO महासचिव ने जहाज़ों के पंजीकरण वाले देशों, जहाज़ मालिकों और संचालकों से आग्रह किया कि वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आवाजाही के दौरान नाविकों को “अनावश्यक ख़तरे” में न डालें.
लगभग 6,000 नाविक अब भी इस जलमार्ग में सैकड़ों जहाज़ों पर फँसे हुए हैं. पहले यहाँ से हर दिन क़रीब 130 जहाज़ गुज़रते थे.
आज यह संख्या काफ़ी घट गई है. हालाँकि, ताज़ा तनाव बढ़ने से पहले नौवहन गतिविधियाँ कुछ हद तक फिर बढ़ी थीं. यह पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक अस्थाई युद्धविराम समझौते के अनुरूप था, जो एक समझौता ज्ञापन का हिस्सा था.
ताज़ा तनाव पर प्रतिक्रिया देते हुए, योरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग, UNECE ने कहा कि 100 दिनों से अधिक समय से जारी व्यवधानों के बाद, खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा पर निर्भर देशों के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति आगे भी बनी रह सकती है.
योरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग में ऊर्जा, आवास और भूमि प्रबन्धन प्रभाग के निदेशक, डैरियो लिगुटी ने कहा, “आने वाले महीनों में क़ीमतें और उनमें उतार-चढ़ाव ऊँचे स्तर पर बने रहने की आशंका है. विशेषकर स्थानीय बाज़ारों में आपूर्ति से जुड़ी मुश्किलें बनी रह सकती हैं.”
यूएन के वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने कहा कि ईंधन और उर्वरकों की वैश्विक कमी तो टल गई है, लेकिन “स्थिति तेज़ी से सामान्य होने पर भी” इस वर्ष हुए व्यवधानों के असर महसूस किए जाते रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि रणनैतिक तेल भंडार कई दशकों के सबसे निचले स्तर पर हैं.
यूएन न्यूज़ से बातचीत में उन्होंने कहा, “अगर अस्थिरता जारी रहती है, तो हमें क़ीमतों में एक और बढ़ोत्तरी और बड़े पैमाने पर कच्चे माल की कमी के लिए तैयार रहना चाहिए.”
भीषण गर्मी से अनिश्चितता बढ़ी
इस बार एक और चुनौती इन झटकों को और गम्भीर बना सकती है – गर्मी के मौसम की चरम तापलहरें, जिन्हें मज़बूत अल-नीनो से बल मिल रहा है. आने वाले महीनों में इसके और प्रबल होने का अनुमान है.
डैरियो लिगुटी ने समझाया कि इससे “शीतलन के लिए ऊर्जा खपत बढ़ सकती है, ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर असर पड़ सकता है और बिजली संयंत्रों को ठंडा रखने के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है.”
UNECE अधिकारी ने, सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क सहित कई क्षेत्रों पर पड़ने वाले इन प्रभावों से निपटने के लिए, ऊर्जा आपूर्ति में नए झटकों से निपटने की क्षमता तत्काल मज़बूत करने पर ज़ोर दिया.
उन्होंने कहा कि इसके लिए ऊर्जा दक्षता उपायों से बचत बढ़ानी होगी, कुल ऊर्जा खपत कम करनी होगी, सीमित संसाधनों पर दबाव घटाना होगा और भंडार मज़बूत करने होंगे.
डैरियो लिगुटी ने कहा, “लम्बी अवधि में, कई देशों में घरेलू ऊर्जा उत्पादन, वितरण क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश को लेकर रुचि फिर बढ़ रही है.”
कुछ अहम बिन्दु
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नए हमलों से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिन्ताएँ बढ़ी हैं.
- यूएन प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका-ईरान युद्ध पूर्ण स्तर पर फिर शुरू होता है, तो इसके क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं.
- नौवहन में व्यवधानों के बीच हज़ारों नाविक अब भी फँसे हुए हैं.
- संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में क़ीमतों व आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है.
- भीषण गर्मी की लहरों से ऊर्जा की माँग बढ़ सकती है और बुनियादी ढाँचे पर दबाव गहरा सकता है.
Source : UN News
