पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले तीन सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सुरक्षा बलों की बढ़ती तैनाती और कथित दमन के खिलाफ आंदोलन चला रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तानी प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। संगठन का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र हो सकता है। इस बीच रावलाकोट में आयोजित एक बड़ी जनसभा में प्रदर्शनकारियों ने ‘ये वतन हमारा है’ के नारे लगाते हुए आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया।
रावलाकोट की जनसभा में प्रशासन को चेतावनी
रावलाकोट में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए JAAC नेता सरदार अमान कश्मीरी ने कहा कि आंदोलनकारी अब तक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें हिंसा की ओर धकेलने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान रेंजर्स और अन्य सुरक्षा बलों की बढ़ती तैनाती पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस्लामाबाद को कश्मीर घाटी में सैन्य बल बढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है।
सुरक्षा बलों की वापसी की मांग
सरदार अमान कश्मीरी ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला देते हुए सुरक्षा बलों की वापसी की मांग की। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों की मांगें पूरी की जाएं और उन पर दबाव बनाने की कोशिश न हो। सभा में मौजूद लोगों ने ‘ये वतन हमारा है’ के नारे लगाए और कहा कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
23 जून के बंद का आह्वान
इसी बीच JAAC नेता शौकत नवाज मीर ने एक ऑडियो संदेश जारी कर मुजफ्फराबाद डिवीजन के लोगों से 23 जून को पूर्ण बंद का सख्ती से पालन करने की अपील की। उन्होंने लोगों से आंदोलन के अगले चरण के लिए तैयार रहने का भी आह्वान किया।
तीन सप्ताह से जारी है विरोध प्रदर्शन
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताहों में PoK के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गई हैं, जिनमें महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारी बंदियों की रिहाई और कथित राज्य दमन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।
1,500 से अधिक लोगों की हिरासत का दावा
JAAC नेताओं का आरोप है कि पिछले तीन सप्ताह के दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने 1,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। संगठन ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने शौकत नवाज मीर के घर पर रात में छापा मारकर तोड़फोड़ की। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तानी प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पहले भी सामने आए थे विवादित वीडियो
मीडिया रिपोर्टस में यह भी कहा गया है कि आंदोलन की शुरुआत के दौरान कुछ वीडियो सामने आए थे, जिनमें पाकिस्तानी फौज और पुलिस को निहत्थे लोगों पर गोली चलाते हुए दिखाए जाने का दावा किया गया था।
निष्कर्ष
PoK में जारी आंदोलन अब केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। JAAC के 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तानी प्रशासन आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
