गाजा में भुखमरी को लेकर इजरायल के दावों पर यूरो-मेड ह्यूमन राइट्स मॉनिटर ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इजरायल संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के आंकड़ों को चुनिंदा तरीके से पेश कर गाजा में भुखमरी की वास्तविक स्थिति को कम करके दिखा रहा है।
यूरो-मेड के मुताबिक, इजरायल जिस 0.5 फीसदी तीव्र कुपोषण के आंकड़े का हवाला दे रहा है, वह सिर्फ एक माप पर आधारित है। वहीं, दूसरे माप बांह की ऊपरी हिस्से की परिधि के आधार पर यह आंकड़ा 1.3 फीसदी है। यानी अध्ययन की अवधि में पांच साल से कम उम्र के करीब हर 77 बच्चों में एक बच्चा तीव्र कुपोषण से प्रभावित था।
संगठन ने बच्चों में 12.2 फीसदी बौनापन का भी जिक्र किया। इसका मतलब है कि लगभग हर आठ बच्चों में एक बच्चा लंबे समय से पोषण की कमी से प्रभावित था।
रिपोर्ट के मुताबिक, अध्ययन गाजा की सिर्फ 83 फीसदी आबादी तक सीमित था। सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण 3.58 लाख से ज्यादा लोग इसमें शामिल नहीं हो सके। इसलिए उनकी पोषण स्थिति का आकलन नहीं किया जा सका।
यूरो-मेड ने स्पष्ट किया कि इस अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि गाजा में अकाल नहीं था। अध्ययन ने केवल जून 2026 की सीमित अवधि में पोषण की स्थिति को देखा था। वहीं, अकाल का आकलन भोजन की खपत, कुपोषण और मृत्यु दर जैसे कई संकेतकों के आधार पर किया जाता है।
यूरो-मेड के अनुसार, जुलाई की नवीनतम रिपोर्टों में सुधार सीमित बताया गया और इसे मानवीय सहायता की आपूर्ति से जोड़ा गया। संगठन ने अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 14 लाख लोग साल के अंत तक गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं, जबकि अप्रैल 2027 तक 74 हजार से ज्यादा बच्चों को तीव्र कुपोषण के इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
यूरो-मेड का कहना है कि कुपोषण के किसी एक आंकड़े को आधार बनाकर गाजा में भुखमरी की पूरी स्थिति को नहीं समझा जा सकता।
