जामिया में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति पर सवाल, क्या है पूरा मामला?

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अरबी विभाग में 10 अगस्त को हुई एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति अब सवालों के घेरे में है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. मसूद आलम की नियुक्ति को लेकर कुछ गंभीर दावे सामने आए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने की बात भी साफ तौर पर कही गई है।

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डॉ. मसूद आलम के विश्वविद्यालय के कुलपति से निजी संबंध हैं। यह भी कहा गया है कि दोनों एक ही गांव से बताए जाते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले को लेकर डॉ. आलम के अतीत पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने दावा किया है कि वह गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़े एक मामले में तिहाड़ जेल में रह चुके हैं। हालांकि, उस मामले की वर्तमान स्थिति और उसके नतीजे की तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी।

मामला सिर्फ एक नियुक्ति तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे करीब एक सप्ताह पहले जामिया के रजिस्ट्रार महताब रिजवी की नियुक्ति को लेकर भी शिक्षा मंत्रालय, UGC और दिल्ली पुलिस में शिकायत की गई थी। शिकायत में FIR दर्ज करने की मांग की गई और आरोप लगाया गया कि रजिस्ट्रार की नियुक्ति विश्वविद्यालय के नियमों के खिलाफ हुई।

डॉ. मसूद आलम का एक अन्य अकादमिक जुड़ाव भी चर्चा में है। वह उदय माहुरकर और चिरायु पंडित की किताब “Veer Savarkar: The Man Who Could Have Prevented Partition” के उर्दू संस्करण के सह-अनुवादक हैं। इस अनुवाद को शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज ने प्रकाशित किया है। सूत्रों ने सवाल उठाया है कि क्या इस अकादमिक जुड़ाव का नियुक्ति प्रक्रिया पर कोई असर पड़ा।

हालांकि, इन सभी दावों पर जामिया का पक्ष सामने नहीं आया है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, विश्वविद्यालय के प्रवक्ता से प्रतिक्रिया लेने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन प्रकाशन तक कोई जवाब नहीं मिला।

फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर नियुक्ति को लेकर उठे सवाल आरोपों और सूत्रों के दावों पर आधारित हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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