झुग्गी बस्ती से UPSC तक सफर बढ़ई के बेटे मोहम्मद सिमाब खान ने रचा इतिहास।

मुंबई के गोवंडी की तंग गलियां में एक ऐसा इलाका जहां जिंदगी हर कदम पर संघर्ष का इम्तिहान लेती है।इन्हीं मुश्किल हालात के बीच एक लड़के ने ऐसा सपना देखा, जिसे पूरा करना आसान नहीं था। नाम है ‘ मोहम्मद सिमाब खान ‘। एक बढ़ई के बेटे सिमाब ने तमाम आर्थिक मुश्किलों और लगातार मिलती असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानी और UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को आखिरकार पास कर दिखाया।

सिमाब एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता बढ़ई थे और मां गृहिणी। आर्थिक सीमाओं के बावजूद माता-पिता ने कभी बच्चों की पढ़ाई से समझौता नहीं किया। सिमाब ने मुंबई के चेंबूर स्थित New Model English High School से पढ़ाई की और K.J. Somaiya College से Microbiology और Biochemistry में ग्रेजुएशन किया।

ग्रेजुएशन के बाद उनके सामने नौकरी करने का रास्ता था, लेकिन सिमाब कुछ अलग करना चाहते थे। उन्होंने Civil Services को अपना लक्ष्य बनाया। UPSC की तैयारी शुरू की, लेकिन उनके आसपास कोई बड़ा aspirant network या peer group नहीं था। उन्होंने Dadar के Pursue IAS में foundation course किया और फिर पूरी मेहनत के साथ तैयारी में जुट गए।

लेकिन इनका ये सफर बिल्कुल आसान नहीं था। करीब 6 से 8 साल तक तैयारी के दौरान उन्हें कई असफलताओं और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा। एक बार तो वे महज ‘ 0.66 अंक ‘ से सफलता से चूक गए। इसी संघर्ष के दौरान करीब सात साल पहले उनके पिता का भी निधन हो गया, जो उनके जीवन में सबसे मजबूत सहारा थे। एक वक्त ऐसा आया जब उन्होंने UPSC छोड़ने तक का विचार कर लिया, लेकिन आत्मविश्वास ने उन्हें फिर खड़ा कर दिया।

सिमाब ने अपनी तैयारी की रणनीति बदली, गलतियों से सीखा और लगातार आगे बढ़ते रहे। तीसरे प्रयास में उन्होंने prelims परीक्षा पास की। इसके बाद मुंबई के Haj House में residential coaching ने उनकी तैयारी को मजबूती दी। पांचवें प्रयास के दौरान वे Mains और Interview की तैयारी के लिए कुछ महीनों के लिए दिल्ली भी आए।

आखिरकार 2023 में सिमाब ने UPSC Civil Services परीक्षा पास कर ली। ट्रेनिंग के बाद 2025 में उन्हें Ministry of Youth Affairs के तहत असम के धुबरी जिले में District Youth Officer के रूप में नियुक्त किया गया।

गोवंडी की गलियों से असम के धुबरी तक का ये सफर सिर्फ एक नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं, बल्कि हिम्मत, धैर्य और लगातार कोशिश की मिसाल है। सिमाब की कहानी का संदेश साफ है अगर संसाधन कम हैं तो हौसला कम मत होने दीजिए, क्योंकि मुश्किल हालात आपके सपनों की सीमा तय नहीं करते।

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