ग़ाज़ा में भुखमरी और कुपोषण रिकॉर्ड स्तर पर; रहने का आसरा और स्वास्थ्य व्यवस्था ठप


फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) ने चेतावनी दी है कि गाज़ा पट्टी “इंसानों के रहने के लिए लगातार मुश्किल जगह” बनती जा रही है, क्योंकि मेडिकल सप्लाई की कमी, बड़े पैमाने पर सीवेज का फैलाव और कुपोषण के लंबे वक़्त तक रहने वाले असर मानवीय संकट को और गहरा कर रहे हैं।

UNRWA की हेल्थ डायरेक्टर, डॉ. अकिहिरो सेइटा ने जापान की जिजी प्रेस के साथ एक ऑनलाइन इंटरव्यू में बिगड़ते हालात का ज़िक्र करते हुए चेतावनी दी कि पहले हुए सीज़फायर समझौतों के बावजूद फ़िलिस्तीनी गंभीर स्वास्थ्य और मानवीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

सेइटा ने कहा कि ज़रूरी मेडिकल सप्लाई की डिलीवरी पर लगी पाबंदियों की वजह से हेल्थ सर्विस आबादी की ज़रूरतों को पूरा करने में बेहद मुश्किलें आ रही हैं, जबकि साफ़-सफ़ाई की बिगड़ती हालत संक्रामक बीमारियों का ख़तरा बढ़ा रही है।

इंटरव्यू में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक़, गाज़ा की 75% से ज़्यादा आबादी खुले में पड़े कचरे और बिना ट्रीट किए गए सीवेज के संपर्क में है। इस गंदगी की वजह से त्वचा की बीमारियां बढ़ी हैं और पानी से होने वाली बीमारियों को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। इस संकट ने पहले से ही बुरी हालत में चल रहे हेल्थकेयर सिस्टम पर और दबाव डाल दिया है, जिससे बच्चों समेत कमज़ोर लोगों के लिए खतरा और बढ़ गया है।

सेइटा ने खाने की भारी कमी के चलते छोटे में गंभीर कुपोषण के लंबे वक़्त तक रहने वाले असर पर भी ज़ोर दिया। सेइटा ने बताया कि बेघर हुए लगभग 20 लाख फ़िलिस्तीनी गाज़ा पट्टी के लगभग 30% हिस्से वाले एक सीमित मानवीय क्षेत्र में जमा हो गए हैं। कई परिवार बहुत ज़्यादा भीड़-भाड़ वाले टेंटों में रह रहे हैं, जहाँ साफ़-सफ़ाई और रहने की सुविधाएँ ठीक नहीं हैं और उन्हें साफ़ पानी, स्वास्थ्य सेवा और दूसरी ज़रूरी सुविधाएँ भी बहुत कम मिल पा रही हैं।

 

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