फिलिस्तीनी सेंटर फॉर प्रिजनर्स स्टडीज (Palestine Center for Prisoners Studies) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अक्टूबर के दौरान इजरायली सेना ने वेस्ट बैंक और यरुशलम के अलग-अलग गांवों, शरणार्थी शिविरों और शहरों में छापेमारी और गिरफ्तारी अभियान तेज़ कर दिए। जिनमें बेक़सूर फिलिस्तीनियों को जबरन गिरफ़्तार किया गया।
संगठन के मुताबिक, इन अभियानों के दौरान दर्जनों फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया। छापेमारी के दौरान लोगों से मौके पर ही पूछताछ की गई और उनके साथ मारपीट भी की गई। सैनिकों ने कुछ घरों पर कब्जा कर उन्हें अस्थायी पूछताछ केंद्रों में बदल दिया।

संगठन के मुताबिक, इन अभियानों के दौरान दर्जनों फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया। छापेमारी के दौरान लोगों से मौके पर ही पूछताछ की गई और उनके साथ मारपीट भी की गई। सैनिकों ने कुछ घरों पर कब्जा कर उन्हें अस्थायी पूछताछ केंद्रों में बदल दिया।
रिपोर्ट के मुताबिक़, इजरायली बलों ने पूछताछ के बाद हिरासत में लिए गए ज़्यादातर फिलिस्तीनियों को रिहा कर दिया। हालांकि, रिहाई के दौरान उन्हें कथित तौर पर चेतावनी दी गई कि वे ऐसी गतिविधियों में शामिल न हों, जिन्हें इजरायली अधिकारी ‘उकसावा’ मानते हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर भी लोगों को धमकियां दी गईं।

रिपोर्ट के मुताबिक़, अल-खलील (हेब्रोन) गवर्नरेट में इजरायली बलों ने शहर की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया। इस दौरान सैकड़ों घरों पर छापेमारी और तलाशी ली गई तथा घरों के सामान को नुकसान पहुंचाया गया।
संगठन ने आरोप लगाया कि इज़राइली सेना ने स्थानीय निवासियों के साथ दुर्व्यवहार किया और कुछ लोगों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया।अल-खलील में चलाए गए इस बड़े गिरफ्तारी अभियान के दौरान 120 से ज़्यादा फिलिस्तीनियों को हिरासत में लिया गया। इनमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और पहले जेल जा चुके लोग भी शामिल थे।

फिलिस्तीनी सेंटर फॉर प्रिजनर्स स्टडीज ने इन अभियानों पर चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक, लगातार छापेमारी और गिरफ्तारियों से वेस्ट बैंक और यरुशलम में आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
