अमेरिका के 2026 के मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा चुनावी झटका लगा है। पार्टी को इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा कि अमेरिकी राजनीति में इसकी तुलना पिछले कई दशकों के बड़े चुनावी झटकों से की जा रही है। खास बात यह है कि सत्ता में होने और चुनाव प्रचार पर रिकॉर्ड पैसा खर्च करने के बावजूद रिपब्लिकन अपनी हार नहीं रोक सके।
रिकॉर्ड खर्च के बावजूद नहीं बची पार्टी की साख
इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को आर्थिक संसाधनों का बड़ा फायदा हासिल था। राष्ट्रपति ट्रंप से जुड़े राजनीतिक संगठनों ने सितंबर से चुनाव के अंतिम दौर तक रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में करीब 277 मिलियन डॉलर खर्च किए। इसके अलावा रिपब्लिकन ने प्रतिस्पर्धी चुनावी क्षेत्रों में डेमोक्रेट्स से अधिक खर्च किया।
द वॉशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण के मुताबिक, करीबी मुकाबलों में रिपब्लिकन ने लगभग 2.6 अरब डॉलर खर्च किए, जबकि डेमोक्रेट्स का खर्च करीब 1.8 अरब डॉलर रहा। इसके बावजूद नतीजे रिपब्लिकन के पक्ष में नहीं आए।

ट्रंप की नीतियां बनीं चुनावी मुद्दा
चुनाव में महंगाई, पेट्रोल की बढ़ती कीमतें, टैरिफ और ईरान के साथ युद्ध जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। मतदाताओं की नाराजगी का असर रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर भी दिखाई दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक़, ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को केंद्र में रखा और कई राज्यों में रैलियां कीं, लेकिन इससे पार्टी को अपेक्षित फायदा नहीं मिला।
डेमोक्रेट्स ने दोनों सदनों में बनाई बढ़त
एसोसिएटेड प्रेस और रॉयटर्स की रिपोर्टों के मुताबिक़, डेमोक्रेट्स ने सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों में बढ़त हासिल कर कांग्रेस पर नियंत्रण प्राप्त किया। इस नतीजे के बाद ट्रंप के लिए अपने बाकी कार्यकाल में नीतियों को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इस चुनाव ने यह भी दिखाया कि भारी चुनावी बजट और राष्ट्रपति का समर्थन होने के बावजूद मतदाताओं की नाराजगी चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।
