अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में आठ साल के लंबे अंतराल के बाद हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजे शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को घोषित कर दिए गए। चुनाव में इतिहास विभाग के शोधार्थी मोहम्मद नोमान अशरफ ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की, जबकि कानून की छात्रा नशरा नईम ने उपाध्यक्ष पद जीतकर इतिहास रच दिया।
नशरा नईम एएमयू छात्रसंघ के इतिहास में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव जैसे तीन प्रमुख पदों में से किसी एक पर निर्वाचित होने वाली पहली महिला बन गई हैं। उनकी जीत को विश्वविद्यालय में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
नोमान अशरफ को मिले 7,797 वोट
अध्यक्ष पद के चुनाव में मोहम्मद नोमान अशरफ ने कुल 7,797 वोट हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद इंतिखाब को 4,121 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इंतिखाब को 3,676 वोट मिले।
जीत के बाद नोमान अशरफ ने कहा कि आठ साल के लंबे संघर्ष के बाद छात्रों को यह अवसर मिला है। उन्होंने इस जीत को खुशी का पल बताते हुए छात्रों के प्रति आभार जताया।

नशरा नईम बनीं AMU की पहली महिला उपाध्यक्ष
उपाध्यक्ष पद पर नशरा नईम ने 7,091 वोट हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी साकिब अली खान को 1,273 वोटों से हराया। साकिब को 5,818 वोट मिले।
नशरा की इस जीत ने विश्वविद्यालय के 105 साल पुराने इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है। जीत के बाद उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और छोटी टीम के बावजूद यह कामयाबी लोगों के समर्पण, साहस और ईमानदारी की वजह से मिली है। उन्होंने नेतृत्व को नए तरीके से परिभाषित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

8 साल बाद हुआ छात्रसंघ चुनाव
AMU में इससे पहले वर्ष 2018 में छात्रसंघ चुनाव हुए थे। इस बार 5 नवंबर को विश्वविद्यालय के 13 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए। मतगणना एबीके स्कूल परिसर में हुई और शुक्रवार सुबह परिणाम घोषित किए गए।
इस चुनाव में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। महिला उम्मीदवारों ने कुल 13 पदों में से छह पर जीत हासिल की, जिनमें कैबिनेट के 10 पदों में से पांच पद शामिल हैं।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून ने शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव संपन्न होने पर खुशी जताई और छात्रसंघ में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का स्वागत किया।
आठ साल बाद छात्रसंघ चुनाव की वापसी और नशरा नईम की ऐतिहासिक जीत ने AMU के छात्र नेतृत्व में नई शुरुआत की है। अब नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सामने छात्रों की समस्याओं को उठाने और चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी होगी।
