मध्य पूर्व संकट: लेबनान में महिलाएँ, सड़क किनारे बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि हिंसक टकराव की वजह से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव बढ़ रहा है और उपचार के लिए सेवाएँ सीमित होती जा रही हैं. लेबनान में हिज़बुल्लाह लड़ाकों और इसराइली सैन्य बलों में लड़ाई के बीच 11 हज़ार से अधिक गर्भवती महिलाएँ प्रभावित हैं और प्रवासी कामगारों के लिए भी जोखिम बढ़ रहे हैं. 

यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के लिए यूएन एजेंसी (UNFPA) की लेबनान में प्रतिनिधि अनन्दिता फ़िलिपोज़ के अनुसार, बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएँ अपना घर छोड़कर जाने के लिए मजबूर हुई हैं. 

उनके पास अति-आवश्यक सेवाएँ की सुलभता नहीं हैं और वे ख़तरनाक परिस्थितियों में बच्चों को जन्म देने के लिए मजबूर हो रही हैं. कुछ महिलाएँ तो सड़क किनारे प्रसव से गुज़री हैं.

UNFPA अधिकारी के अनुसार, लेबनान में 11,600 महिलाओं पर इस टकराव का असर हुआ है, जिनमें से 4 हज़ार अगले तीन महीनों के दौरान बच्चों को जन्म देंगी. 

28 फ़रवरी को ईरान पर इसराइली व अमेरिकी हवाई हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में भड़के भीषण टकराव ने लेबनान, कुवैत, बहरीन, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ओमान समेत इस क्षेत्र में स्थित अनेक देशों को अपनी चपेट में ले लिया है.

ईरान में अब तक 1,255 लोगों की जान गई है और 15 हज़ार से अधिक घायल हु्ए हैं. वहीं लेबनान में 634 लोग मारे गए हैं और 1,500 घायल हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने ईरान में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं पर 18 हमलों की पुष्टि की है, जिनमें 8 लोग मारे गए हैं. वहीं, लेबनान में ऐसे 25 हमले होने की जानकारी हैं, जिनमें 16 की मौत हुई है और 29 घायल हैं. 

हिंसा के कारण लेबनान में 48 प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्रों और 5 अस्पतालों को बन्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिससे उपचार सेवाओं के विकल्प सीमित होते जा रहे हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने आगाह किया है कि पूरे क्षेत्र में अस्पताल व स्वास्थ्यकर्मी, हताहतों की बढ़ती संख्या, घायल लोगों का इलाज करने, दवाओं, रक्त, व सर्जरी के लिए सामान की क़िल्लत का सामना कर रहे हैं. 

इसके अलावा, भीड़भाड़ भरे आश्रय केन्द्रों व विस्थापन शिविरों में बीमारियों के फैलने का जोखिम बढ़ रहा है. जल आपूर्ति प्रणालियों को क्षति पहुँची है, टीकाकरण कार्यक्रमों में व्यवधान आया है और परमाणु प्लांट पर हमलों से विकिरण जोखिम के प्रति चिन्ता गहरा रही है.

संकट में फँसे प्रवासी कामगार 

एक अनुमान के अनुसार, मध्य पूर्व के विभिन्न देशों में लगभग 3 करोड़ प्रवासी कामगार रहते हैं, लेकिन हिंसक टकराव की वजह से उनके लिए कठिनाई बढ़ती जा रही है. 

लेबनान में क़रीब 2 लाख प्रवासी श्रमिक हैं, जो इथियोपिया, श्रीलंका, केनया, सूडान, बांग्लादेश और अन्य देशों से आते हैं, और जिनका रोज़गार कृषि, निर्माण, घरेलू कामकाज समेत अन्य क्षेत्रों में है.

इनमें से लगभग 30 हज़ार लोगों के विस्थापित होने की आशंका है. कुछ लोग आधिकारिक आश्रय स्थलों का रुख़ करने में असमर्थ हैं या फिर अनिच्छुक हैं.

उधर, ईरान में आम जनजीवन में आए व्यवधान से बड़ी संख्या में प्रवासी प्रभावित हुए हैं, जिनमें अफ़ग़ान नागिरक भी हैं.

यूएन एजेंसियाँ, प्रभावित आबादी तक आपात सहायता पहुँचाने में जुटी है और सुरक्षित बाहर निकाले जाने या फिर फँसे हुए लोगों की उनके देश वापसी में मदद के लिए तैयार हैं.

Source : UN News

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