अल-अक़्सा मस्जिद की मौजूदा स्थिति को लेकर सोशल मीडिया पर एक बड़ा वैश्विक डिजिटल अभियान शुरू किया गया है। एक्टिविस्टों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने #WeWillOpenOurAqsa हैशटैग के साथ इस पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य अल-अक़्सा मस्जिद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाना और इस पर बने कथित डिजिटल मीडिया ब्लॉकेड को तोड़ना है।
अभियान के आयोजकों के मुताबिक, यह पहल ऐसे समय में शुरू की गई है जब अल-अक़्सा मस्जिद को लगातार 13 दिनों से पूरी तरह बंद रखा गया है और मस्जिद के अंदर नमाज़ अदा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए अभियान के जरिए दुनिया भर के मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एकजुट आवाज़ उठाने की योजना बनाई गई है।
आयोजकों का कहना है कि इस अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य रमज़ान के अंतिम दस दिनों के दौरान अल-अक़्सा मस्जिद के समर्थन में वैश्विक स्तर पर जनमत तैयार करना है। इस्लाम में रमज़ान के आख़िरी दस दिन बेहद पवित्र माने जाते हैं, इसलिए इस समय को अभियान के लिए विशेष रूप से चुना गया है।
अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिभागियों को तैयार पेशेवर मीडिया सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें वीडियो, ग्राफिक्स और पहले से तैयार कैप्शन शामिल होंगे, ताकि सोशल मीडिया पर एक ही संदेश को व्यापक रूप से साझा किया जा सके और हैशटैग को वैश्विक ट्रेंड में लाया जा सके।
इस पहल में शामिल होने के इच्छुक लोगों को एक विशेष बॉट के माध्यम से संपर्क करने के लिए कहा गया है। इसके जरिए उन्हें अभियान से जुड़ी सभी मीडिया सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे आधिकारिक लॉन्च से पहले ही ऑनलाइन प्रचार में हिस्सा ले सकें।
अभियान का आधिकारिक लॉन्च आज रात 9:00 बजे (यरुशलम समय) किया जाएगा। इसके साथ ही “We Will Open Our Aqsa” शीर्षक से एक लाइव प्रसारण भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें अल-अक़्सा से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाले कई शिक्षाविद, कार्यकर्ता और कंटेंट क्रिएटर्स शामिल होंगे।
इस चर्चा में अब्दुल्ला मारूफ़, ज़ियाद अबूहलबेह, इमान अल-मख़लूफ़ी, अधम अबू सलमिया, इमान अजीसी और इशाक अराफ़ा सहित कई अन्य एक्टिविस्ट हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम का संचालन इंस्टाग्राम पर एक्टिविस्ट नवरास अबू सालेह करेंगे।
अभियान के आयोजकों का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य अल-अक़्सा मस्जिद से जुड़े मुद्दे को वैश्विक स्तर पर लोगों के सामने बनाए रखना और इस विषय पर मीडिया व जनसमर्थन को मजबूत करना है, खासकर उस समय जब मस्जिद में आने वाले लोगों पर प्रतिबंध और मस्जिद का बंद रहना जारी है।
