उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की पीसीएस परीक्षा में इस बार एक नाम ने अभ्यर्थियों का ध्यान खास तौर पर खींचा—बरेली के समाजसेवी फरमान हसन खान। सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र में उनका नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विकल्प के रूप में शामिल किया गया, जिसके बाद परीक्षार्थियों और स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
दरअसल, यह सवाल मिस्र के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “ऑर्डर ऑफ नील” से जुड़ा था। इस प्रश्न में दिए गए विकल्पों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फरमान हसन खान का नाम भी शामिल था, जिसने इसे खास बना दिया।

दिलचस्प बात यह है कि यह पहला मौका नहीं है जब फरमान का नाम किसी प्रतियोगी परीक्षा में सामने आया हो। इससे पहले UPSSSC की परीक्षा में भी उनसे जुड़ा सवाल पूछा जा चुका है। उस प्रश्न में मई 2023 में मिले “भारत गौरव रत्न” सम्मान के संदर्भ में उनका नाम क्रिकेटर सुरेश रैना, राजनेता योगेंद्र यादव और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ विकल्प के रूप में रखा गया था।
फरमान हसन खान का नाम अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं और करंट अफेयर्स की दुनिया में भी अपनी जगह बना चुका है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में उनका उल्लेख कई तैयारी संस्थानों की सामग्री में भी किया जाता रहा है।
8 अगस्त 1995 को जन्मे फरमान मियां बरेली के निवासी हैं और सामाजिक व धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से पूरी की है। वे काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रज़ा खान के दामाद हैं।
वर्तमान में वे 1920 में स्थापित संगठन “जमात रज़ा-ए-मुस्तफा” के राष्ट्रीय महासचिव हैं। साथ ही, “आला हज़रत ताजुश्शरिया वेलफेयर सोसाइटी” के संस्थापक के रूप में भी वे समाजसेवा के कई कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।

पीसीएस परीक्षा के प्रश्न पत्र में उनका नाम शामिल होना न केवल उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि अब स्थानीय स्तर पर काम करने वाले समाजसेवियों की पहचान राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है।
