अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है। 8 अप्रैल 2026 को जो 2 हफ्ते का युद्धविराम (सीज़फायर) हुआ था, वह 22 अप्रैल को खत्म हो गया। हालांकि Donald Trump ने इसे आगे बढ़ाने की बात कही है, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया है कि ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी। नाकेबंदी को भी एक तरह की युद्ध रणनीति माना जाता है। कुछ लोगों को लग रहा है कि अब युद्ध खत्म हो गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई जानकार मानते हैं कि असली खतरा अभी टला नहीं है।
पुरानी और नई ताकत की राजनीति
पहले (दूसरे विश्व युद्ध से पहले) बड़े देश छोटे देशों पर सीधे राज करते थे, जैसे ब्रिटेन भारत पर करता था। लेकिन 1945 के बाद हालात बदले। छोटे देशों में आज़ादी की मांग बढ़ने लगी, इसलिए बड़े देशों ने सीधा शासन छोड़ दिया।
इसके बजाय उन्होंने एक नया तरीका अपनाया, जिसे “नव-औपनिवेशिक व्यवस्था” कहा जाता है। इसमें देश बाहर से तो आज़ाद दिखते हैं, लेकिन अंदर से उन पर बड़ी ताकतों का प्रभाव बना रहता है।
ईरान क्यों अलग है?
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व के ज्यादातर देश पश्चिमी ताकतों के प्रभाव में हैं, लेकिन ईरान एक अपवाद माना जाता है।
1979 में Ruhollah Khomeini के नेतृत्व में एक बड़ी क्रांति हुई, जिसमें मोहम्मद रज़ा पहलवी की सरकार को हटा दिया गया। इसके बाद ईरान ने खुद को पश्चिमी प्रभाव से अलग कर लिया।
इससे पहले 1953 में मोहम्मद मोसादेग ने तेल को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें हटा दिया गया था।
हाल के हमले और बढ़ता तनाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि जून 2025 में 12 दिन का युद्ध हुआ और 28 फरवरी 2026 को फिर हमला हुआ। इन दोनों का मकसद ईरान की सरकार बदलना था, लेकिन ये सफल नहीं हुए।
इसके बाद 40 दिन तक लड़ाई चली और फिर अस्थायी सीज़फायर हुआ। इस दौरान ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से जवाब भी दिया।
क्या आगे बड़ा युद्ध हो सकता है?
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, सिर्फ हवाई हमलों से किसी देश की सरकार नहीं बदली जा सकती। इसलिए अब जमीन पर युद्ध (ग्राउंड इनवेज़न) की आशंका जताई जा रही है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती मौजूदगी को इसी का संकेत माना जा रहा है।
अगर ऐसा होता है, तो यह युद्ध लंबा और बहुत खतरनाक हो सकता है, कुछ हद तक वियतनाम युद्ध जैसा।
निष्कर्ष
सीज़फायर बढ़ने के बावजूद हालात सामान्य नहीं हैं। नाकेबंदी जारी है और तनाव भी। ऐसे में आने वाले समय में बड़ा संघर्ष होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
