यमन में भूख संकट कम करने व शान्ति स्थापना के लिए तेज़ कार्रवाई की अपील

संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारियों ने यमन में बढ़ती भूख और संकट को रोकने व स्थाई शान्ति की दिशा में प्रयास तेज़ करने की अपील की है. यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद को बताया कि हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच 2022 का युद्धविराम अब भी लागू है, लेकिन युद्ध अब तक सुलझा नहीं है और इस अनिश्चितता की क़ीमत यमन की जनता चुका रही है.

हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि यमनी लोगों के साथ बैठकों में यह बात सामने आती है कि देश भर में बनी हुई मोर्चाबन्द रेखाएँ, संसाधनों को ख़त्म कर रही हैं, समाज में विभाजन को गहरा कर रही हैं और समाज के बढ़ते सैन्यीकरण को तेज़ कर रही हैं.

उन्होंने यह भी बताया कि आर्थिक मजबूरी के कारण, छात्र और शिक्षक तक जीवित रहने के लिए सशस्त्र समूहों में शामिल होने के लिए मजबूर हो रहे हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक यमन का युद्ध अनसुलझा रहेगा, तब तक देश के भीतर और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की स्थिति में उससे बाहर भी अस्थिरता का जोखिम बना रहेगा.

स्थाई समाधान अहम

यूएन अधिकारी ने कहा कि पक्षों को क्षेत्रीय तनाव में आई अस्थाई कमी के इस अवसर का उपयोग करते हुए एक ऐसी राजनैतिक प्रक्रिया को पुनर्जीवित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जो यमन में युद्ध का स्थाई समाधान सुनिश्चित कर सके.

विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने हूती विद्रोहियों द्वारा हिरासत में लिए गए 73 संयुक्त राष्ट्र कर्मियों की रिहाई की अपील दोहराई है, जिनमें से कई कर्मियों को 2024 से मनमाने ढंग से हिरासत में रखा गया है.

उन्होंने कहा कि महासचिव के हालिया वक्तव्य में स्पष्ट किया गया है कि ये हिरासतें, अन्तरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन हैं, जिससे परिवारों को गहरा मानसिक कष्ट होता है और लाखों ज़रूरतमन्द लोगों तक सहायता पहुँचाने की, यूएन क्षमता बाधित होती है.

ग़ैर-क़ानूनी हिरासत की निन्दा

सुरक्षा परिषद भी यूएन कर्मचारियों को हिरासत में रखे जाने की निन्दा करते हुए, सभी बन्दियों की बिना शर्त, सुरक्षित और तत्काल रिहाई की माँग कर चुकी है.

हैंस ग्रुंडबर्ग ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने सहयोगियों की रिहाई के लिए हर सम्भव प्रयास जारी रखेगा और सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि वह तब तक अपने प्रयास जारी रखे जब तक सभी कर्मी मुक्त नहीं हो जाते.

संयुक्त राष्ट्र के राहत प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने भी, इस अपील का समर्थन करते हुए  बिगड़ते मानवीय हालात के बारे में चेतावनी जारी की है.

उन्होंने कहा कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो तीव्र भूख की समस्या दीगर बढ़ेगी तथा लोगों की जानें भी जा सकती हैं.

उन्होंने बल देकर कहा कि यमन में मानवीय स्थिति लगातार गम्भीर होती जा रही है.

लाखों लोग भूख की चपेट में

इस महीने की शुरुआत में, संयुक्त राष्ट्र समर्थित वैश्विक खाद्य सुरक्षा मंच के नए विश्लेषण में बताया गया था कि यमन के सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में लगभग 50 लाख लोग गम्भीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं.

साथ ही, यदि अन्तरराष्ट्रीय सहायता में कटौती जारी रही तो यह संकट और भी गहरा सकता है.

प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने सुरक्षा परिषद को बताया कि भूख का संकट केवल ख़ाली थालियाँ नहीं है, बल्कि यह छीनी गई ज़िन्दगियाँ और भविष्य हैं.

उन्होंने कहा कि 5 वर्ष से कम उम्र के 22 लाख से अधिक बच्चे तीव्र कुपोषण का सामना कर रहे हैं और यदि उन्हें निरन्तर सहायता नहीं मिली, तो उनके जीवन पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेंगे.

उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे ज़रूरतें बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे सहायता घटती जा रही है.

प्रमुख टॉम फ़्लैचर ने कहा कि हर वित्तीय कटौती का सीधा मानवीय असर होता है…बिना इलाज का कुपोषण, और सहायता से वंचित रह जाने वाला समुदाय.

टॉम फ़्लैचर ने बताया कि OCHA के संकट में सहायता कार्रवाई मामलों के निदेशक वर्तमान में यमन में हैं और समुदायों के साथ सीधे बातचीत कर रहे हैं.

वहाँ परिवार बार-बार विस्थापन का सामना कर रहे हैं, बच्चे स्कूल से बाहर हैं, बीमारियाँ फैल रही हैं, महिलाओं और लड़कियों को गम्भीर हिंसा और अभाव झेलना पड़ रहा है, और युद्ध, बाढ़ तथा सूखे के कारण आजीविका पूरी तरह नष्ट हो चुकी है.

उन्होंने कहा कि स्थानीय साझीदार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बिना निरन्तर वित्तीय सहायता के वे अधिक काम नहीं कर सकते हैं.

तत्काल कार्रवाई की पुकार

टॉम फ़्लैचर ने सुरक्षा परिषद से तीन प्रमुख क़दम उठाने की अपील की:

प्रथम, हिरासत में लिए गए यूएन कर्मियों की रिहाई सुनिश्चित की जाए.

दूसरा, मानवीय प्रतिक्रिया के लिए धन उपलब्ध कराया जाए, क्योंकि वर्तमान में सहायता अपील 15 प्रतिशत से भी कम मिल पाई है, जिससे OCHA को अपनी गतिविधियाँ घटानी पड़ रही हैं और कई लोगों को सहायता से वंचित रहना पड़ रहा है.

तीसरा, शान्ति प्रयासों को समर्थन दिया जाए. 

उन्होंने कहा कि मानवीय सहायता केवल स्थिति को किसी हद तक सम्भाल सकती है, लेकिन संकट का अन्त नहीं कर सकती.

वास्तविक समाधान केवल राजनैतिक प्रक्रिया से ही सम्भव है, जो यमन के लोगों की अगुवाई में हो और जिसे सुरक्षा परिषद का समर्थन प्राप्त हो.

Source : UN News

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