डॉ. हुसाम अबू सफिया की हिरासत पर बढ़ी चिंता, मानवाधिकार संगठन ने की रिहाई की मांग

रामल्लाह: फ़िलिस्तीनी सेंटर फॉर द डिफेंस ऑफ प्रिज़नर्स ने इज़राइल की सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की कड़ी आलोचना की है, जिसमें गाजा के कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक डॉ. हुसाम अबू सफिया की रिहाई की अपील खारिज कर दी गई।

अदालत ने फैसला दिया है कि डॉ. अबू सफिया को “अनलॉफुल कॉम्बैटेंट लॉ” के तहत हिरासत में रखा जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें बिना किसी औपचारिक आरोप और बिना आरोपपत्र दाखिल किए जेल में रखा गया है।

मानवाधिकार संगठन का कहना है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा कन्वेंशनों के खिलाफ है। इन नियमों के तहत युद्ध और संघर्ष के दौरान डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मियों को विशेष सुरक्षा दी जाती है।

संगठन के अनुसार, डॉ. अबू सफिया इस समय नफहा जेल में एकांत कारावास में हैं। उनका दावा है कि उन्हें कठिन और अपमानजनक परिस्थितियों में रखा गया है और जरूरी चिकित्सा सुविधाएं व बंदियों को मिलने वाले बुनियादी अधिकार भी नहीं दिए जा रहे हैं। इससे उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।

सेंटर ने डॉ. अबू सफिया की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए इज़राइली अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी तुरंत रिहाई और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही, चिकित्सा और मानवीय सेवाओं से जुड़े कर्मियों की मनमानी हिरासत बंद करने की अपील की है।

संगठन ने इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस, विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और डॉ. अबू सफिया की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाने की मांग की है।

रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली बलों ने 27 दिसंबर 2024 को गाजा के कमाल अदवान अस्पताल में कार्रवाई के दौरान डॉ. अबू सफिया को गिरफ्तार किया था। साल 2025 में उनकी हिरासत कई बार बढ़ाई गई, जिसमें अक्टूबर 2025 में छह महीने का विस्तार भी शामिल है।

फरवरी 2025 में डॉ. अबू सफिया पहली बार इज़राइली मीडिया द्वारा जारी एक वीडियो में दिखाई दिए थे। वीडियो में वे हथकड़ियों और बेड़ियों में नजर आए, जिसके बाद मानवाधिकार संगठनों ने इसकी आलोचना की थी।

10 जून 2026 को अदालत में पेशी के दौरान भी उनके हाथ और पैर जंजीरों से बंधे हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनके चेहरे पर यातना के निशान दिखाई दे रहे थे और वे काफी कमजोर तथा थके हुए लग रहे थे।

फ़िलिस्तीनी आंकड़ों के मुताबिक, गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से इज़राइल ने 737 चिकित्सा कर्मियों को हिरासत में लिया है। इनमें डॉक्टर, पैरामेडिक्स और नर्सें शामिल हैं।

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