श्रीनगर: कश्मीर की वादियों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपनी पहचान बनाने वाले सुहैब फिरोज जीलानी आज युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। करीब एक दशक तक रग्बी में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने एक साहसिक फैसला लेते हुए मार्शल आर्ट पेंचक सिलाट को अपना करियर चुना। यह निर्णय जोखिम भरा जरूर था, लेकिन सुहैब की मेहनत, अनुशासन और अटूट विश्वास ने इसे सफलता की कहानी में बदल दिया।
2019 में पेंचक सिलाट से जुड़े सुहैब ने बेहद कम समय में राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और एशियाई स्तर पर रजत पदक हासिल कर देश तथा जम्मू-कश्मीर का गौरव बढ़ाया।
सुहैब की उपलब्धियां केवल पदकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह उस संघर्ष, समर्पण और जुनून की मिसाल हैं जो किसी भी सपने को हकीकत में बदल सकता है। उन्होंने साबित किया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो नई राह चुनना कभी जोखिम नहीं बल्कि अवसर बन जाता है।
आज सुहैब फिरोज जीलानी का सफर कश्मीर के हजारों युवाओं को यह संदेश देता है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, मेहनत और लगन के बल पर दुनिया के किसी भी मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी कहानी खेल जगत में उभरती प्रतिभाओं के लिए उम्मीद, प्रेरणा और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
