Gaza का स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह चरमराने की कगार पर, NGOs ने जताई गंभीर चिंता

गाजा: गाजा पट्टी में जारी मानवीय संकट के बीच गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के नेटवर्क ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पूर्ण पतन के बेहद करीब पहुंच गई है। संगठनों के अनुसार, चिकित्सा एवं जरूरी संचालन सामग्री की आपूर्ति पर प्रतिबंध, ईंधन की कमी और अस्पतालों की घटती क्षमता के कारण मरीजों और घायलों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना लगातार मुश्किल हो रहा है। रविवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NGO Network ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां जारी रहीं तो गाजा की स्वास्थ्य सुविधाएं बुनियादी सेवाएं देने में भी असमर्थ हो सकती हैं। वहीं, चिकित्सा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं और स्वास्थ्य क्षेत्र के पास उपलब्ध संसाधन घटते जा रहे हैं।

NGO Network द्वारा साझा आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से गाजा के 38 अस्पतालों में से 26 अस्पताल सेवा से बाहर हो चुके हैं। संगठन ने इसे स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गंभीर संकट बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं की उपलब्धता में करीब 50 फीसदी की कमी है, जबकि चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों की कमी लगभग 58 फीसदी तक पहुंच गई है। ऑक्सीजन की उपलब्धता भी चिंता का विषय बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, गाजा में मौजूद 34 ऑक्सीजन स्टेशनों में से केवल 12 ही काम कर रहे हैं, जिससे ICU और लगातार ऑक्सीजन पर निर्भर मरीजों के लिए जोखिम बढ़ गया है।

स्वास्थ्य संकट केवल दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की कमी तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चिकित्सा कर्मचारियों के आवागमन पर प्रतिबंधों के कारण 99 बसों के संचालन पर भी असर पड़ने का खतरा है। टायर, बैटरी और तेल जैसी जरूरी सामग्री की कमी से मेडिकल स्टाफ के अस्पतालों तक पहुंचने में भी परेशानी हो रही है। इस बीच, बीमार और घायलों के मेडिकल रेफरल भी लगातार जमा हो रहे हैं। मीडिया में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 20,000 मेडिकल रेफरल लंबित हैं और मरीजों के लिए गाजा से बाहर इलाज के लिए जाने की प्रक्रिया प्रतिबंधों के कारण प्रभावित है।

गाजा में अक्टूबर 2023 से बिजली आपूर्ति बाधित रहने के कारण अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र मुख्य रूप से जनरेटर पर निर्भर हैं। लेकिन इन जनरेटरों को चलाने के लिए जरूरी ईंधन, तेल, स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव सामग्री की भी कमी बनी हुई है। NGO Network के अनुसार, उपलब्ध होने पर एक लीटर तेल की कीमत करीब 1,000 डॉलर तक पहुंचने का दावा किया गया है। कुछ अस्पताल जनरेटर चालू रखने के लिए इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा इस्तेमाल करने के प्रयास कर रहे हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में इस्तेमाल होने वाले जनरेटरों को हर महीने लगभग 2,500 लीटर तेल की आवश्यकता बताई गई है। ऐसे में ईंधन और संचालन सामग्री की आपूर्ति में लगातार बाधाएं अस्पतालों की कार्यक्षमता पर सीधा असर डाल रही हैं।

NGO Network के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 20 गैर-सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को 19 सितंबर से डीजल आपूर्ति बंद होने की जानकारी दी है। इनमें 13 अस्पताल और सात स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। संगठन के अनुसार, इसके पीछे फंडिंग की कमी बताई गई है। गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था का बड़ा हिस्सा जनरेटरों और ईंधन पर निर्भर है। ऐसे में डीजल आपूर्ति में कमी से अस्पतालों और चिकित्सा उपकरणों के संचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

NGO Network ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गाजा में बिजली आपूर्ति बहाल कराने और चिकित्सा एवं मानवीय सामग्री के प्रवेश पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए दबाव बनाने की अपील की है। संगठन ने कहा कि दवाओं और चिकित्सा सामग्री की कमी, ईंधन संकट, ऑक्सीजन स्टेशनों की सीमित क्षमता, स्वास्थ्य कर्मचारियों की आवाजाही में बाधा और लंबित मेडिकल रेफरल—ये सभी संकट एक साथ गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव डाल रहे हैं।

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