तुर्की के एर्दोगन ने साइप्रस के दो-राज्य समाधान पर जोर दिया

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने रविवार को उत्तरी साइप्रस की यात्रा के दौरान द्वीप के लिए द्वि-राज्यीय समाधान का पूर्ण समर्थन जताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह पूर्वी भूमध्यसागरीय द्वीप के मौजूदा विभाजन को यथार्थ के रूप में स्वीकार करे।

यह यात्रा 1974 में तुर्की द्वारा किए गए सैन्य हस्तक्षेप की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई। उल्लेखनीय है कि तुर्की ने यह कदम उस समय उठाया था जब ग्रीस समर्थित सैन्य तख्तापलट के बाद साइप्रस में राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया था। इसके बाद 1983 में उत्तरी साइप्रस तुर्की गणराज्य (TRNC) की स्वतंत्रता की घोषणा हुई, जिसे अब तक केवल तुर्की ने मान्यता दी है।

रविवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा, “हम द्वीप पर द्वि-राज्यीय समाधान के पक्षधर हैं और इसी दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं। अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ज़मीनी सच्चाई को स्वीकार करे और साइप्रस समस्या के यथार्थवादी समाधान की दिशा में आगे बढ़े।”

राष्ट्रपति एर्दोगन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ ही दिन पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बताया था कि न्यूयॉर्क में साइप्रस के प्रतिद्वंद्वी नेताओं के बीच हुई बातचीत “रचनात्मक” रही है, हालांकि सीमा चौकियों और विभाजन रेखा को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है।

तुर्की राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तरी साइप्रस के अलगाव को समाप्त करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “TRNC के साथ राजनयिक, राजनीतिक और आर्थिक संबंध स्थापित किए जाने चाहिए। दशकों से तुर्की साइप्रसवासियों के साथ जो अन्याय हो रहा है, उसे अब खत्म किया जाना चाहिए।”

ज्ञात हो कि साइप्रस विवाद के समाधान हेतु जुलाई 2017 में स्विट्ज़रलैंड के क्रांस-मोंटाना में हुई आखिरी उच्चस्तरीय शांति वार्ता बिना किसी सफलता के समाप्त हो गई थी।

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