ग़ाज़ा में लगातार हो रही हैं मौतें, बढ़ रहे हैं विस्थापन व हताशा

ग़ाज़ा में लगातार हो रही हैं मौतें, बढ़ रहे हैं विस्थापन व हताशा

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इसराइल के क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ाज़ा पट्टी में, लगातार हो रहे हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की मौतैं और बड़े पैमाने पर विस्थापन, सामान्य बात बनती जा रही है. मानवीय मामलों की समन्वय एजेंसी – OCHA ने आगाह किया है कि हर दिन ऐसी मौतें हो रही हैं जिन्हें रोका जा सकता है.

इस बीच, इसराइल द्वारा जारी किए जा रहे बेदख़ली आदेशों से, बड़े पैमाने पर विस्थापन और हताशा देखे जा रहे हैं.

OCHA ने कहा है कि उसे लगातार ऐसी बेहद चिन्ताजनक ख़बरें मिल रही हैं कि गम्भीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों और वयस्कों को अस्पतालों में दाख़िल कराया जा रहा है जबकि वहाँ उनके पर्याप्त उपचार के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं हैं.

ईंधन की भारी कमी

OCHA ने 9 जुलाई को ईंधन की सीमित आपूर्ति फिर से शुरू होने के बावजूद, ग़ाज़ा में ऊर्जा संकट गहराने की चेतावनी भी दी है.

संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ, ईंधन की सीमित आपूर्ति फिर से शुरू होने के बाद से, केरेम शेलॉम सीमा चौकी के ज़रिए, केवल 6 लाख लीटर डीज़ल ही ग़ाज़ा के भीतर भेज पाया है.

ईंधन की कमी के कारण पिछले कुछ दिनों में, कूड़ा-कचरा संग्रहण को रोकना पड़ा है, और पानी के अतिरिक्त कुएँ भी बन्द करने पड़े हैं. 

हर गुज़रते दिन के साथ, लोगों के पास स्वच्छ पानी और स्वास्थ्य सेवाएँ कम होती जा रही हैं. और भूतल पर सीवेज का पानी भर रहा है.

दरअसल, जीवन रक्षक कार्यों को जारी रखने के लिए, हर दिन लाखों लीटर ईंधन की आवश्यकता होती है. 

अब जो सीमित मात्रा में ईंधन आ रहा है, वह मुख्य रूप से स्वास्थ्य, जल और दूरसंचार सेवाओं के साथ-साथ, बिजली वाहनों के लिए आवंटित किया जा रहा है.

इस बीच, गाज़ा के अन्दर मानवीय गतिविधियों पर इसराइली प्रतिबन्ध जारी है और इसराइली अधिकारियों ने बीते सप्ताह के दौरान, सहायता सामग्री से भरे केवल 14 ट्रकों को ग़ाज़ा में दाख़िल होने की अनुमति दी है.

उधर जून महीने में बच्चों में भुखमरी की दर अपने सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई, और 5 हज़ार 800 से अधिक लड़कियाँ व लड़के, औचक कुपोषण के शिकार हुए हैं.

मीडिया पर लगे प्रतिबन्ध हटाएँ

इस बीच, फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूए सहायता एजेंसी – UNRWA के प्रमुख फ़िलिपे लज़ारिनी ने, ग़ाज़ा में अन्तरराष्ट्रीय मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबन्ध हटाने का आहवान किया है.

फ़िलिपे लज़ारिनी ने शुक्रवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है, “650 दिनों से आम लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं और अन्तरराष्ट्रीय मीडिया को ग़ाज़ा के भीतर जाने की अनुमति नहीं है.”

उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान 200 से ज़्यादा फ़लस्तीनी पत्रकार मारे गए हैं.

“मीडिया प्रतिबन्ध से दुष्प्रचार और झूठी जानकारी के फैलाव अभियान को बढ़ावा मिलता है, और ये दुस्सूचना अभियान, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों से सीधे तौर पर प्राप्त होने वाले आँकड़ों और बयानों पर सवाल उठाते हैं.”

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