81% छात्र असफल, लेकिन नूंह की सनोवर ने रची सफलता की कहानी

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भारत में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले हजारों युवाओं के लिए Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) सबसे बड़ी चुनौती साबित होती है। इस बार भी जून 2025 में आयोजित परीक्षा ने इसकी कठिनाई को दोहराया, जहाँ कुल 37,207 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया, लेकिन केवल 6,707 ही सफल हो पाए। नतीजतन पास प्रतिशत सिर्फ 18.61% रहा और 81% से अधिक छात्र असफल हो गए।

लेकिन इसी कठिन माहौल में हरियाणा के नूंह जिले की बेटी सनोवर हुसैन ने अपनी मेहनत और हौसले से कमाल कर दिखाया। मुरादबास गाँव निवासी और मोहम्मद हुसैन की पुत्री सनोवर ने इस परीक्षा में 300 में से 206 अंक हासिल किए और जिले के साथ-साथ प्रदेश का नाम रोशन किया।

नूंह, जिसे नीति आयोग ने देश के सबसे पिछड़े जिलों में गिना है, वहाँ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। ऐसे हालात में किसी छात्रा का डॉक्टर बनना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक भी है।

एफएमजीई को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। विदेशों जैसे रूस, यूक्रेन, फिलीपींस आदि से MBBS कर लौटे विद्यार्थियों को भारत में चिकित्सा प्रैक्टिस करने के लिए यह परीक्षा पास करनी होती है। इस बार के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय मेडिकल शिक्षा के मानक कितने ऊँचे हैं।

जब हजारों उम्मीदवार असफल रहे, तब सनोवर ने न केवल पास किया बल्कि उच्च अंक हासिल कर दिखाया कि मजबूत इरादों और लगन के सामने संसाधनों की कमी कोई मायने नहीं रखती। उनकी यह सफलता नूंह जिले के युवाओं—खासकर बेटियों—के लिए नई प्रेरणा बन गई है।

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