सन 1857 की आज़ादी की जंग में गोरखपुर ज़िले के राजा सैय्यद इनायत अली का नाम बेख़ौफ़ और जाँबाज़ योद्धाओं में लिया जाता है। जब अंग्रेज़ों के ज़ुल्म और साज़िशों से पूरा हिंदुस्तान कराह रहा था, तब राजा इनायत अली ने अपनी ज़मीन, दौलत और जान सब कुछ आज़ादी की लड़ाई के नाम कर दिया।
1858 में अंग्रेज़ी फौजों ने जब उनके क़िले पर हमला किया, तो उन्होंने बहादुरी से मुक़ाबला किया। उन पर इल्ज़ाम लगाया गया कि वे लखनऊ की बेगम हज़रत महल की मदद कर रहे हैं। इसी बहाने अंग्रेज़ों ने उन्हें गोरखपुर के कलेक्टर के दरबार में बुलाया। लेकिन राजा इनायत अली ने झुकने से इंकार कर दिया। अंग्रेज़ों ने निर्दयता से उन पर गोलियाँ चला दीं और उन्हें शहीद कर दिया। उनकी जायदाद लूट ली गई, हवेलियाँ तोड़ दी गईं और पूरा ख़ानदान बर्बाद कर दिया गया।
राजा इनायत अली के परिजन सालों तक भटकते रहे, किसी को शरण नहीं मिली। बहुत से लोग नेपाल चले गए, कुछ ग़ायब हो गए। अंग्रेज़ों ने उनका वजूद मिटाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी कुर्बानी इतिहास में दर्ज हो गई।
राजा सैय्यद इनायत अली ने दिखा दिया कि गोरखपुर की मिट्टी भी ऐसे वीर पैदा करती है, जो अपनी आख़िरी सांस तक आज़ादी के लिए लड़ते हैं।
