अमजदी बेगम : आज़ादी की लड़ाई की बहादुर सिपाही

नई दिल्ली। भारत की आज़ादी की जंग में औरतों ने भी बड़ी भूमिका निभाई और उनमें एक नाम है अमजदी बेगम का। अमजदी बेगम ने अपने दौरों के ज़रिए कांग्रेस के सत्याग्रह आंदोलन के लिए करोड़ों रुपये का चंदा इकट्ठा किया। बी-अम्मा की तरह उन्होंने भी देशभर की औरतों को आज़ादी की राह में जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

29 दिसंबर 1921 को महात्मा गांधी ने अपने अख़बार यंग इंडिया में अमजदी बेगम की बहादुरी का ज़िक्र किया। उन्होंने लिखा कि बेगम अपने शौहर के साथ जनता के कामों में पूरी तरह सक्रिय रहती थीं और बिहार, असम व बंगाल के सफ़र में कांग्रेस की मदद करती थीं। गांधीजी ने उनकी तक़रीरों को भी साहसी बताया और माना कि उनकी हिम्मत उनके शौहर से किसी तरह कम नहीं थी।

शौहर के इंतकाल के लगभग 15 साल बाद अमजदी बेगम ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन कांग्रेस की तहरीक में महिलाओं की अगुवाई करने वाली यह बहादुर शख़्सियत हमेशा याद रखी जाएगी।

अमजदी बेगम का योगदान साबित करता है कि भारत की आज़ादी सिर्फ़ मर्दों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि औरतों की कुर्बानी और हिम्मत ने भी इसे नई ताक़त दी।

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