गाज़ा की तबाह होती ज़िंदगी पर एक और काला दिन। फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में गाज़ा पट्टी के अस्पतालों में 77 शहीद और 222 घायल लाए गए। लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा डरावनी है, क्योंकि कई शव अब भी मलबे और सड़कों पर पड़े हैं, जहाँ तक बचाव दल पहुँचना तक मुमकिन नहीं।
मंत्रालय के मुताबिक़, 7 अक्टूबर 2023 से अब तक इसराइली हमलों में 66,225 फ़लस्तीनी शहीद और 168,938 घायल दर्ज किए जा चुके हैं। केवल 18 मार्च 2025 से युद्ध के दोबारा शुरू होने के बाद ही 13,357 शहीद और 56,897 लोग घायल हो चुके हैं।
मानवीय संकट और स्वास्थ्य व्यवस्था का पतन
गाज़ा के अस्पताल अब मरहमगाह से ज़्यादा जंग का मोर्चा बन चुके हैं। जगह नहीं बची, दवाइयाँ खत्म हो रही हैं और बिजली-पानी तक की किल्लत है। इसराइल पर सीधा आरोप है कि उसने अस्पतालों को निशाना बनाया और ज़रूरी उपकरण व ईंधन की सप्लाई रोकी।
मंत्रालय ने चेताया कि गाज़ा सिटी में अस्पतालों तक पहुँचना “बेहद ख़तरनाक” है। इसके बावजूद मेडिकल टीमें जान जोखिम में डालकर घायलों की मदद कर रही हैं।
ज़मीनी हालात
गुरुवार सुबह इसराइली सेना ने अल-सबरा, तेल अल-हवा, शेख़ रदवान और अल-नस्र जैसे मोहल्लों में घरों को विस्फोटकों से उड़ाया और गोलाबारी की। यह अभियान “Gideon’s Chariots 2.” नाम से 11 अगस्त को शुरू हुआ था। इसका मकसद साफ़ दिखता है – तबाही, विस्थापन और डर।
युद्ध का 727वाँ दिन
लगातार 727 दिनों से जारी बमबारी और नाकाबंदी ने गाज़ा को रहने लायक कोई जगह ही नहीं छोड़ी। लोग दक्षिण की ओर मजबूर होकर जा रहे हैं, लेकिन वहाँ भी सुरक्षा और बुनियादी ज़रूरतों की कोई गारंटी नहीं।
गाज़ा आज सिर्फ़ जंग का मैदान नहीं, बल्कि एक मानवीय त्रासदी का नाम बन चुका है।
