आइएमएफ़ ने बजाई खतरे की घंटी!

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भारत के लिए एक बड़ी चिंताजनक खबर है कि ब्लूम्सबर्ग और रॉयटर्स के मुताबिक़ रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के प्रतिरोध को नज़रअंदाज़ कर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोश (आइएमएफ़) लगातार गिरते जा रहे भारतीय रुपये को स्थिर मुद्रा से नीचे धकेल क्रॉलिंग पेग श्रेणी में डालने जा रहा है।

IMF द्वारा भारत की विदेशी मुद्रा विनियमन व्यवस्था को ‘क्रॉलिंग पेग’ के रूप में दोबारा वर्गीकृत किया जा रहा है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अस्थिरता और विदेशी निवेशकों के विश्वास पर असर पड़ सकता है। यह कदम डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के घटते मूल्य और हाल ही में विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के कारण उठाया गया है, जिससे विदेशी निवेशकों में चिंता बढ़ सकती है।

क्रॉलिंग पेग मुद्राएं वे होती हैं जिनके लगातार गिरने से उनकी स्थिति लगातार कमजोर होती रहती है और आइएमएफ़ उनकी विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) को लगातार बदलता रहता है; असल में नीचे गिराता रहता है।

‘क्रॉलिंग पेग’ व्यवस्था के तहत यदि अस्थिरता बनी रहती है तो भारत में पूंजी का बहिर्गमन और विदेशी निवेश में कमी की संभावना बढ़ जाती है। यह निवेशकों के लिए जोखिम का संकेत है।

अभी भारत के रुपये को छोड़ सिर्फ़ अर्जेंटीनियन पेसो और बांग्लादेश का टका ही क्रॉलिंग पेग करेंसी हैं। अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान का रुपया तक उनमें शामिल नहीं हैं। रुपए की ऐसी दुर्गति पहले कभी नहीं देखी गई।

यह कोई आकस्मिक घटना नहीं है बल्कि यह बुलाई गई मुसीबत है क्योंकि स्वघोषित ईश्वरीय अवतार का सारा ध्यान वोट चोरी करके चुनाव दर चुनाव जीतते हुए सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने और कांग्रेस मुक्त भारत बनाने पर लगा हुआ है।

वैसे भी यू पी विधानसभा चुनाव जीतने के लिए की गई नोटबंदी और महीने भर में करीब 100 बदलावों वाले जीएसटी के चलते भारतीय मुद्रा और अर्थव्यवस्था पहले ही संकट में थी जो 2023 तक आइएमएफ़ की फ्लोटिंग श्रेणी में थी और उसके बाद ही कुछ समय के लिए स्थिर श्रेणी में आई थी। किन्तु अब यह फ़िर से उसके निशाने पर है।

बेहद चिंताजनक बात यह है कि यदि आइएमएफ़ ने यह फैसला कर दिया तो पहले से तबाह भारतीय अर्थव्यवस्था गहरी खाई में लुढ़क जाएगी जिसका सबसे ज़्यादा नुक़सान निर्यातकों और आयातकों को होगा। निर्यातकों को दाम कम मिलेंगे और आयातकों को ज़्यादा देना पड़ेगा।

IMF की यह नई ‘क्रॉलिंग पेग’ श्रेणी भारत के लिए कड़ी चेतावनी है, जो निवेशकों, निर्यातकों और आर्थिक नीति निर्धारकों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है।

अगर भारतीय मुद्रा के लिए क्रॉलिंग पेग व्यवस्था लंबे समय तक बनी रहती है तो इससे रुपए पर लगातार दबाव पड़ेगा और यहाँ की अर्थव्यवस्था पर कई दुष्प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है।

इसलिए सरकार और आरबीआइ को सक्रियता से आर्थिक सुधारों तथा दीर्घकालिक मुद्रा स्थिरता के लिए नीति तय करनी होगी जिसमें वह पहले ही असफल है। यदि इस दिशा में कुछ किया होता तो रुपए की ऐसी ऐतिहासिक दुर्गति नहीं हुई होती…!!

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