फौज़िया तरन्नुम: एक IAS अधिकारी की inspiring यात्रा, जिसने कलबुर्गी को नई पहचान दी

बेंगलुरु में पली-बढ़ी फौज़िया तरन्नुम की कहानी उस युवा लड़की से शुरू होती है जिसने कॉर्पोरेट दुनिया की चमक छोड़कर देश की सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाया। TCS में स्थिर नौकरी होने के बावजूद उनके मन में बस एक ही सपना था लोगों की ज़िंदगी में बदलाव लाना। यही सपना उन्हें UPSC की तैयारी की ओर ले गया। पहले प्रयास में IRS और फिर दोबारा प्रयास कर 2014 में देश में 31वीं रैंक लाते हुए उन्होंने IAS की राह पकड़ी।

कलबुर्गी की डिप्टी कमिश्नर बनकर उन्होंने इस सूखे-पीड़ित जिले में उम्मीद के नए बीज बोए। उन्होंने सदियों पुराने मिलेट्स को दोबारा ज़िंदा किया और उन्हें “कलबुर्गी रोट्टी” के रूप में राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इस पहल ने हज़ारों महिलाओं को SHG के माध्यम से रोज़गार दिया और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई साँसें। इसी काम ने उन्हें Excellence in Governance Award दिलाया।

लोकतंत्र को मज़बूत बनाने में भी इनका योगदान कम नहीं। 2024 में मतदाता सूचियों की साफ़ और डिजिटल जाँच कर उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से Best Electoral Practices Award मिला।

चिक्कबल्लापुर और कोप्पल में स्कूलों, आंगनवाड़ियों, जल संरक्षण और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में उनके सुधार आज भी मिसाल हैं। व्यक्तिगत हमलों और चुनौतियों के बावजूद फौज़िया शांत, दृढ़ और अपने काम के प्रति समर्पित रहीं।

फौज़िया तरन्नुम की कहानी बताती है— जब जुनून, ईमानदारी और मेहनत साथ हों, तो एक अधिकारी भी पूरे जिले की तकदीर बदल सकता है।

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