इसराइली कार्रवाई से, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में फ़लस्तीनियों के लिए कठिन हालात

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संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्यालय (OCHA) ने चेतावनी दी है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट के उत्तरी इलाक़ों में इसराइली सैन्य बलों की कार्रवाई में तेज़ी आई है, जिससे आम फ़लस्तीनी विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. वहाँ आवाजाही पर पाबन्दी है, स्कूलों में पढ़ाई बन्द है और बार-बार इन सुरक्षा अभियानों की वजह से स्थानीय समुदायों के जीवन पर गहरा असर हुआ है.

यूएन कार्यालय ने बताया है कि 25 नवम्बर से 1 दिसम्बर के दौरान इसराइली सैन्य बलों ने उत्तरी इलाक़ों में अपनी कार्रवाई का विस्तार किया, जिससे 95 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी प्रभावित हुए हैं, विशेष रूप से जिनीन और टुबास गवर्नरेट में.

इस दौरान, कर्फ़्यू लागू किया जाता है, बुलडोज़र का इस्तेमाल किया जाता है, आवाजाही पर सख़्ती बरती जाती है, और लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर होते हैं. इस वर्ष की शुरुआत से ही इसराइली सेना द्वारा बार-बार सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है.

इससे घरों, निजी सम्पत्ति, सड़कों, जल आपूर्ति व्यवस्था समेत सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को नुक़सान पहुँचने, स्कूलों के बन्द होने और बुनियादी सेवाओं में व्यवधान आने की भी घटनाएँ हुई हैं. 17 हज़ार लोगों के लिए जल सेवा पर असर हुआ है. 

OCHA का कहना है कि इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा हमले भी जारी हैं. इस वर्ष, अब तक ऐसे 1,680 हमलों की जानकारी जुटाई गई हैं, जिनमें पश्चिमी तट में 270 से अधिक समुदायों में आम लोग हताहत हुए हैं या फिर उनकी सम्पत्ति को क्षति पहुँची है.

हिंसा में घायल होने वाले फ़लस्तीनियों की संख्या 1 हज़ार के आँकड़े को पार कर चुकी है, जिनमें 700 से अधिक लोग, इसराइली बस्तियों के बाशिन्दों के हमलों में घायल हुए हैं, जबकि अन्य या तो इसराइली बलों की कार्रवाई में घायल हुए हैं या इस बारे में पुख़्ता जानकारी नहीं है.

हाल ही में, यूएन मानवाधिकार कार्यालय ने बताया था कि 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हुए हमलों के बाद से क़ाबिज पश्चिमी तट में 1 हज़ार से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 233 बच्चे हैं.

यूएन कार्यालय ने दोहराया है कि एक क़ाबिज़ शक्ति के तौर पर इसराइल का यह क़ानूनी दायित्व है कि फ़लस्तीनियों की रक्षा की जाए और पश्चिमी तट में अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी और मानवाधिकार क़ानून के अनुरूप सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखा जाए.

“इसराइली बलों द्वारा किसी भी प्रकार के बल प्रयोग के बाद अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त क़ानून प्रवर्तन मानकों का पालन किया जाना होगा.”

यूएन मानवतावादी कार्यालय ने इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा हिंसा को रोकने, बस्तियों के विस्तार को रोकने के लिए, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से ठोस क़दम उठाए जाने की अपील की है.

ग़ाज़ा: असुरक्षा से सहायता प्रयास हो रहे कमज़ोर

उधर, ग़ाज़ा में व्याप्त असुरक्षा के बीच मानवीय सहायता अभियान पर असर हुआ है और आम नागरिकों के जीवन पर जोखिम है.

आपात राहत मामलों के लिए यूएन कार्यालय ने बताया कि तथाकथित ‘यैलो लाइन’ के पास स्थित इलाक़ों में हवाई हमलों, गोलाबारी और इमारतों को ध्वस्त किए जाने की घटनाएँ हुई हैं.

‘यैलो लाइन’ के ज़रिए ग़ाज़ा के आधे से अधिक हिस्से को काट दिया गया है और वहाँ इसराइली सैन्य बल तैनात हैं. पिछले सप्ताह, इस रेखा में बदलाव आने की वजह से पूर्वी ग़ाज़ा सिटी में लोग नए सिरे से विस्थापित हुए हैं.

मानवीय सहायताकर्मियों ने चेतावनी दी है कि सर्दी के मौसम में, आश्रय स्थलों पर भीड़ और बार-बार विस्थापित होने की वजह से बच्चों, वृद्धजन, विकलांग व्यक्तियों के लिए जोखिम अधिक है.

ग़ाज़ा में स्वास्थ्य सेवाओं पर भीषण दबाव बना हुआ है. युद्धविराम के बाद से 42 स्वास्थ्य केन्द्रों को फिर से खोला गया है, लेकिन 61 प्रतिशत स्वास्थ्य केन्द्रों पर अभी कामकाज ठप है, जिससे फ़िलहाल संचालित केन्द्रों पर दबाव बढ़ा है. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने आगाह किया है कि 5 वर्ष से कम आयु के दो-तिहाई से अधिक बच्चों को केवल 2 या फिर उससे कम प्रकार की ही खाद्य सामग्री मिल पाई है, जिससे उनके लिए कुपोषण का जोखिम है.  

पिछले कुछ सप्ताह में खाद्य सहायता का विस्तार हुआ है, लेकिन ईंधन, खाना पकाने की गैस और नक़दी की क़िल्लत है, जिससे आम लोगों के विविधतापूर्ण आहार खाने के सीमित साधन हैं.

Source: UN News Hindi

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