ग़ाज़ा: खाद्य चीज़ों तक पहुँच हुई बेहतर, मगर हालात अब भी भीषण

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ग़ाज़ा में एक गर्भवती महिला इस डर में जी रही थी कि कुपोषण के कारण शायद वो अपना बच्चा नहीं खो बैठे. दस दिन पहले, उसने अपने बच्चे को जन्म दिया और अब वो ख़ुद के और अपने बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर पा रही है. यह सकारात्मक बदला आ सका है यूएन खाद्य सहायता एजेंसी – WFP की बदौलत, जिसकी सहायता सुविधाएँ एक बार फिर क्षमता के साथ सक्रिय हुई हैं.

फ़लस्तीन के लिए इस यूएन एजेंसी के प्रतिनिधि एंटोनी रेनार्ड ने गुरूवार को, ग़ाज़ा से न्यूयॉर्क में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि युद्धविराम लागू होने के दो महीने के दौरान, खाद्य सामग्री तक लोगों की पहुँच कुछ बेहतर हुई है मगर ग़ाज़ा के लोग अब भी अत्यन्त कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं.

एक दिन पहले ही यूएन और उसी साझीदार एजेंसियों ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया था कि वो इसराइल से मानवीय सहायता आपूर्ति के रास्ते में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए दबाव डाले.

एंटोनी रेनार्ड ने बताया कि WFP ने, लगभग 10 लाख लोगों तक भोजन के बक्से और गेहूँ के आटा पहुँचाया है.

यूएन खाद्य सहायता एजेंसी यूनीसेफ़ के साथ मिलकर, तीन लाख से अधिक लोगों को, ऐसी चीज़ें मुहैया करा रही है जिनसे लोगों में कुपोषण होने से रोका जा सके और जो लोग पहले से ही कुपोषित हैं उन्हें उससे बाहर निकलने में मदद मिले.

एजेंसी ने साथ ही, अस्थाई शिक्षा केन्द्रों को एक लाख 90 हज़ार किटें मुहैया कराई हैं जिनमें उच्च ऊर्जा वाले बिस्कुट और विटामिनों व प्रोटीन से युक्त पट्टियाँ शामिल हैं.

WFP के प्रतिनिधि ने पुष्टि की अब लोग औसतन रोज़ाना भोजन की दो ख़ुराकें खा रहे हैं, जबकि जुलाई में ये औसत, दिन में केवल एक भोजन-ख़ुराक के बराबर था.

उन्होंने कहा, “भोजन तक पहुँच ही पर्याप्त नहीं है. ग़ाज़ा पट्टी में लोगों के रहन-सहन के हालात अब भी भीषण बने हुए हैं.”

बारिश और सर्दी ने बढ़ाईं मुसीबतें

बारिश और सर्दियों के नम हालात, कमज़ोर हालात में रहने वाले लोगों की कठिनाइयाँ और बढ़ा रहे हैं. एंटोनी रेनार्ड ने 5 बच्चों की एक माँ का उदाहरण दिया जो जिस तम्बू में रह रहे थे, वह पानी में भीग गया था.

उन्होंने बताया, “वो महिला इस वास्तविकता में जीवित बच सकी कि वो पानी में नहीं डूबी क्योंकि उन्होंने अपने गद्दों का स्तर किसी तरह ऊँचा कर लिया था.”

इस बीच, बहुत से लोग, भोजन पकाने के लिए आग जलाने की ख़ातिर, कूड़े-कचरे या लकड़ियों का प्रयोग कर रहे हैं.

WFP का कहना है कि लोगों को खाद्य सहायता पहुँचाने के लिए उसे, आगे तक ऐसे इलाक़ों में पहुँचना होगा, जहाँ अभी इसराइली बल तैनात हैं, जिनमें उत्तर में जबालिया और बीत लाहिया जैसे इलाक़े शामिल हैं. एजेंसी, बीत लाहिया इलाक़े में पिछले सप्ताह एक खाद्य वितरण केन्द्र स्थापित करने में सफल रही.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र के उप प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने, यूएन मुख्यालय में नियमित प्रैस वार्ता में बताया कि बुधवार को जारी वक्तव्य में आगाह किया गया है कि इसराइल की नई नीतियाँ, सहायता प्रयासों को कमज़ोर कर रही हैं और मानवीय सहायता व्यवस्था के ढह जाने का जोखिम उत्पन्न कर रही हैं.

इनमें, अन्तरराष्ट्रीय ग़ैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के लिए कथित रूप से एक अस्पष्ट व राजनीति से प्रेरित मंशा पर आधारित नई पंजीकरण व्यवस्था भी शामिल है.

Source: UN News Hindi

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