पश्चिमी तट: 72 हज़ार फ़लस्तीनी परिवारों को आपात कृषि सहायता की तुरन्त आवश्यकता

संयुक्त राष्ट्र के एक नए विश्लेषण के अनुसार, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में खेती व पशुपालन पर निर्भर 72 हज़ार से अधिक परिवारों को जल्द से जल्द कृषि सहायता मुहैया कराए जाने की ज़रूरत है.

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का एक नया सर्वेक्षण दर्शाता है कि पश्चिमी तट में कृषि पर निर्भर 90 प्रतिशत से अधिक परिवारों की आय का स्रोत समाप्त हो गया है. इसके अलावा, फ़सलों व मवेशियों के उत्पादन, उनकी बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है जिससे कठिन हालात पैदा हो रहे हैं.

यूएन एजेंसी ने जुलाई-अगस्त 2025 में पश्चिमी तट में कराए गए एक सर्वेक्षण के आधार पर यह जानकारी दी है.

इस क्षेत्र में कृषि अब भी एक अहम जीवनरेखा है. पश्चिमी तट में रहने वाले 7 लाख परिवारों में से लगभग 1.15 लाख परिवार अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं. इस वजह से, अर्थव्यवस्था का यह सैक्टर खाद्य सुरक्षा व आय के लिए महत्वपूर्ण है.

इस वर्ष, पश्चिमी तट में कराए जाने वाला यह दूसरा सर्वेक्षण है, जिसके अनुसार, कृषि निर्भर परिवारों को तुरन्त नक़दी व अन्य प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, ताकि हिंसा, आर्थिक संकट और आय स्रोत के समाप्त होने से उपजी चुनौतियों से निपटा जा सके. 

पश्चिमी तट में इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा किए जाने वाले हमलों व हिंसा में वृद्धि हुई है जबकि फ़लस्तीनी आबादी के लिए आर्थिक कठिनाइयाँ गहरा रही हैं. 

योरोपीय संघ के वित्तीय समर्थन से इस सर्वेक्षण में यह आकलन किया गया है कि ग़ाज़ा पट्टी में हिंसक टकराव से पश्चिमी तट में खेती व पशुपालक परिवारों पर किस तरह का असर हुआ है. 

इसके लिए, 1.5 हज़ार परिवारों से जानकारी जुटाई गई, जिनमें फ़सल उत्पादक, मवेशी पालने वाले और उन दोनों पर निर्भर परिवारों से बात की गई.

संकट की वजह

सर्वेक्षण के नतीजे दर्शाते हैं कि ग्रामीण परिवारों पर दबाव बढ़ रहा है. पश्चिमी तट में कृषि पर निर्भर हर 10 में से 9 परिवारों, यानि क़रीब 1 लाख घर-परिवारों ने हाल ही में कम से कम एक झटके का सामना किया है.

इनमें हिंसा, जीवन-व्यापन की बढ़ती क़ीमतें, रोज़गार समाप्त होने जैसी समस्याएँ सबसे अधिक नज़र आई हैं.

अनेक परिवार पिछले वर्षों के दौरान, खेतों में काम करने से प्राप्त होने वाली आय पर भी निर्भर थे. अक्टूबर 2023 में इसराइल पर हुए हमलों से पहले, सर्वे के 41 प्रतिशत प्रतिभागी इसराइल में या उनकी बस्तियों में काम कर रहे थे.

मगर, युद्ध भड़कने के बाद इनमें से लगभग 90 प्रतिशत का रोज़गार छिन गया और आधी संख्या में ही लोगों को वैकल्पिक रोज़गार मिल पाया है. इनमें भी अधिकाँश कृषि में हैं, जहाँ स्थिति पहले से ही कठिन है.

फ़लस्तीनी परिवारों ने जल की सीमित सुलभता, आवाजाही पर सख़्ती और भूमि तक पहुँचने में मुश्किलों जैसी समस्याओं का उल्लेख किया है. उसके अलावा, कृषि के लिए ज़रूरी सामग्री की उपलब्धता, और ईंधन व परिवहन की ऊँची क़ीमत भी एक बड़ा अवरोध है. 

कृषि, एक कारगर उपाय

सर्वेक्षण के अनुसार, इन चुनौतियों के बावजूद, स्थानीय परिवारों के लिए भोजन व आय को सुनिश्चित करने के नज़रिए से, कृषि अब भी सबसे कारगर उपायों में से है.

यूएन एजेंसी का कहना है कि बीज व उवर्रक, सूखे के प्रति सहनसक्षम फ़सलों, जल टैंक, पशुओं के लिए आश्रय स्थल व डेयरी प्रसंस्करण उपकरणों के ज़रिए आजीविकाओं व सम्पत्तियों की रक्षा की जा सकती है.

इसके समानान्तर, मानवीय सहायता के लिए मार्ग मुहैया कराया जाना होगा ताकि ज़रूरतमन्द आबादी तक बिना किसी देरी के मदद पहुँचाई जा सके. परिवारों को संकट के गर्त में धँसने से बचाने के लिए यह ज़रूरी है कि पर्याप्त धनराशि की उपलब्धता हो.

Source : UN News Hindi

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