वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनियों पर “घुटन भरी” नीतियाँ, अपार्थाइड जैसी स्थिति: संयुक्त राष्ट्र

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनियों की ज़िंदगी को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इज़राइल की भेदभावपूर्ण नीतियों के कारण हालात इतने बदतर हो गए हैं कि वे अब एक अपार्थाइड यानी (रंगभेदी) व्यवस्था जैसे दिखाई देने लगे हैं।

संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ व्यवस्थित भेदभाव पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों को हर स्तर पर दबाया जा रहा है। पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, परिवार से मिलने और ज़ैतून की फ़सल काटने तक पर इज़राइली क़ानूनों और नीतियों के तहत सख़्त और भेदभावपूर्ण पाबंदियाँ लगाई जाती हैं।

रिपोर्ट में इज़राइल द्वारा अपनाए गए क़ानूनी और प्रशासनिक क़दमों की आलोचना की गई है, जिनके ज़रिए सेटलमेंट विस्तार और व्यवहारिक विलय को बढ़ावा दिया जा रहा है। मई 2025 में इज़राइल की सिक्योरिटी कैबिनेट ने वेस्ट बैंक में ज़मीन के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया दोबारा शुरू की, जिसे सेटलमेंट मज़बूत करने की कोशिश बताया गया है।

नवंबर 2025 में जारी एक सर्वे में स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा तक पहुँच में फ़िलिस्तीनियों के साथ गंभीर असमानताओं का खुलासा हुआ। इसके अलावा मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये नीतियाँ अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन हैं और फ़िलिस्तीनियों की ज़िंदगी को और कठिन बना रही हैं।

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