चेन्नई में शिक्षा और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में काम करने वाली निखत फातिमा सोहेल ने तीन दशकों में हजारों बच्चों और युवाओं की ज़िंदगी बदल दी है। वे MWA मैट्रिकुलेशन स्कूल की प्रमुख हैं और अकादमी फॉर वीमेंन की सह-अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा वे कई अन्य शिक्षा संस्थाओं से जुड़ी हैं, जो विशेष रूप से मुस्लिम युवाओं और महिलाओं के लिए काम करती हैं।
निखत की प्रेरणा उनके स्कूल के दिनों से ही शुरू हुई थी। Sacred Heart School में पढ़ाई के दौरान उन्होंने NCC के प्रोजेक्ट्स के तहत अनाथालयों में सेवा की। यही अनुभव उनके जीवन का पहला कदम था शिक्षा और philanthropy की ओर।
उन्होंने 5 सीखने के केंद्र स्थापित किए, विशेष रूप से बच्चों के लिए जिनके सीखने में कठिनाई होती है। इसके साथ ही वे 1,500 छात्रों वाले स्कूल का संचालन भी करती हैं। उनका कहना है, “मैंने 30 साल लड़कियों और उनके सामाजिक उत्थान के लिए काम किया।”
निखत का काम सिर्फ शिक्षा तक ही सीमित नहीं है। उनका रियल एस्टेट बिज़नेस मॉडल समाजिक प्रशिक्षण का भी माध्यम है। वे बेरोज़गार युवाओं, विधवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं, उन्हें रोजगार दिलाती हैं और उनकी आमदनी ₹20,000 से ₹30,000 तक बढ़ाती हैं।
इस साल, वे अपने स्कूल को रैंप-फ्रेंडली बनाने की योजना भी बना रही हैं ताकि विकलांग छात्र भी आसानी से पढ़ाई कर सकें। स्कूल के 20% छात्रों को मुफ्त शिक्षा मिलती है। यहां खेल, धर्म, अंग्रेज़ी और राज्य पाठ्यक्रम पर भी बराबर ध्यान दिया जाता है।
निखत का मानना है कि सामाजिक उद्यम चलाने के लिए धन की ज़रूरत नहीं, बल्कि समय और सही वित्तीय प्रबंधन महत्वपूर्ण है। उनके काम ने साबित कर दिया है कि एक व्यक्ति का जुनून और समर्पण समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
