राजस्थान के मुस्लिम समाज में, खासकर कुरैशी बिरादरी के बीच, निकाह को लेकर एक सकारात्मक सामाजिक बदलाव तेजी से उभर रहा है। फिजूलखर्ची, दहेज और दिखावे से दूर रहकर सादगी के साथ निकाह संपन्न करने की परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई “नो दहेज, नो डिनर, नो गार्डन” मुहिम अब व्यापक असर दिखाने लगी है। जयपुर से शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे प्रदेश के अन्य इलाकों तक फैल रही है और समाज की सोच को नई दिशा दे रही है।
इस अभियान का मकसद निकाह जैसे पाक रिश्ते को सादगी और सुन्नत के अनुसार अंजाम देना है, न कि महंगे मैरिज गार्डन, भारी दावतों और दिखावे से जोड़ना। इस सोच की नींव 24 दिसंबर 2024 को जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र में रखी गई, जब वरिष्ठ समाजसेवी व व्यवसायी छुट्टन कुरैशी ने अपनी बेटी आलिमा का निकाह ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष नईम कुरैशी के पुत्र के साथ नूरानी मस्जिद में बेहद सादगी के साथ संपन्न कराया। इस निकाह में न तो भव्य सजावट की गई और न ही किसी प्रकार की शाही दावत का आयोजन हुआ।

इस आयोजन ने समाज को स्पष्ट संदेश दिया कि निकाह प्रतिस्पर्धा या प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच पवित्र रिश्ता है। कार्यक्रम में मौजूद ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिराज अहमद कुरैशी ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह कदम समाज में व्याप्त गलत परंपराओं को बदलने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
इस मुहिम को व्यवस्थित रूप देने का काम इस्लाहे मआशरा कमेटी कर रही है। कमेटी का उद्देश्य दहेज प्रथा, देर रात तक चलने वाले डीजे, महंगी दावतों और गार्डनों में होने वाले अनावश्यक खर्च पर रोक लगाना है। इसके सदस्य लोगों से सीधा संवाद कर उन्हें समझा रहे हैं कि निकाह को सादगी और इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप संपन्न करना ही सही रास्ता है।
हाल के दिनों में इस पहल का असर जमीन पर भी देखने को मिला है। 6 जनवरी 2026 को झोटवाड़ा निवासी मेराज कुरैशी के पुत्र सोहेल का निकाह एमडी रोड की अंजुम के साथ मस्जिद कुरैशियान में सादगीपूर्वक संपन्न हुआ। इस निकाह में किसी तरह की भव्य सजावट या भारी दावत नहीं थी। मेहमानों का स्वागत केवल खजूर और हल्के मीठे व्यंजनों से किया गया।
इसी क्रम में 8 जनवरी को झोटवाड़ा स्थित नूरानी मस्जिद में एक और सादगी भरा निकाह होने जा रहा है, जिसमें मेराज कुरैशी की पुत्री शहनाज और जहीरुद्दीन के पुत्र जुनैद का निकाह जोहर की नमाज के बाद शरीयत के अनुसार संपन्न होगा। यहां भी किसी तरह की भव्यता या दावत का आयोजन नहीं किया जाएगा।

इस अभियान के तीन प्रमुख आधार तय किए गए हैं—
नो दहेज, ताकि बेटियों के सम्मान की रक्षा हो और गरीब परिवार आर्थिक बोझ से बच सकें।
नो डिनर, जिससे खाने की बर्बादी और अनावश्यक खर्च रोका जा सके।
नो गार्डन, ताकि महंगे मैरिज गार्डनों के बजाय मस्जिदों में सादगी से निकाह हो।
कुरैशी समाज की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत बनकर सामने आई है। साथ ही यह युवाओं को भी यह सिखा रही है कि सादगी, धार्मिक मूल्यों और रिश्तों की पवित्रता ही समाज की असली पहचान है। समाजसेवियों का मानना है कि इस नई सोच से पूरे मुस्लिम समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और आने वाले समय में यह मुहिम राजस्थान ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों और समुदायों तक भी पहुंचेगी।
इस तरह कुरैशी समाज ने यह साबित कर दिया है कि सामूहिक इच्छाशक्ति और जागरूकता के जरिए दहेज, फिजूलखर्ची और दिखावे जैसी सामाजिक बुराइयों को चुनौती देकर एक सशक्त और प्रगतिशील समाज का निर्माण किया जा सकता है।
Source : awazthevoice
