संक्षेप में: ग़ाज़ा में परिवारों को नक़दी सहायता, सीरिया में आम नागरिकों की रक्षा का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठन, ग़ाज़ा पट्टी में ज़रूरतमन्द फ़लस्तीनी परिवारों तक सहायता पहुँचाने के लिए अपने प्रयास जारी रखे हुए हैं. उधर, सीरिया के अलेप्पो में भड़की लड़ाई पर विराम लगाने के प्रयासों के बावजूद, हालात बद से बदतर हो रहे हैं, जिसका ख़ामियाज़ा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है.

यूएन मानवतावादी कार्यालय (OCHA) के अनुसार, सोमवार व बुधवार के दौरान, ग़ाज़ा में 5 हज़ार से अधिक परिवारों को आपात नक़दी सहायता मुहैया कराई गई है, ताकि वे अति-आवश्यक सामान ख़रीद सकें.

वर्ष 2025 में, ग़ाज़ा पट्टी में 3.40 लाख परिवारों को कम से कम एक बार यह सहायता प्रदान की गई थी. 

उधर, क़ाबिज़ पश्चिमी तट में, जेरिचो गवर्नरेट के ‘एरिया C’ में एक चरवाहा समुदाय के 20 फ़लस्तीनी परिवारन विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं. उन्होंने इसराइली बस्तियों के निवासियों द्वारा किए गए हमलों और डराए-धमकाए जाने की घटनाओं के बाद यह इलाक़ा छोड़ा है. 

बताया गया है कि इन धमकियों के साथ इन फ़लस्तीनी परिवारों के लिए जल आपूर्ति व बिजली नैटवर्क को ठप कर दिया गया था.  

पश्चिमी तठ के उत्तरी हिस्से में, इसराइली बस्तियों के निवासियों ने गुरुवार को कथित रूप से वाहनों, एक स्कूल, एक नर्सरी समेत अन्य सम्पत्तियों में आगज़नी को अंजाम दिया था. नबलूस गवर्नरेट के कुछ इलाक़ों में इन घटनाओं में कुछ लोगों के घायल होने की ख़बर है.

पिछले वर्ष, यूएन कार्यालय ने फ़लस्तीनियों के विरुद्ध ऐसे 1,800 हमले होने की पुष्टि की थी, जिनमें 280 समुदायों के आम लोग हताहत हुए और उनकी सम्पत्तियों को नुक़सान पहुँचा. वर्ष 2006 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर ये घटनाएँ हुई हैं.

सीरिया: अलेप्पो में नए सिरे से भड़की झड़पों पर चिन्ता

संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया के दूसरे सबसे बड़े शहर, अलेप्पो में भड़की लड़ाई में तेज़ी आने और उससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर मंडराते जोखिम पर चिन्ता जताई है.

यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने शुक्रवार को बताया कि लड़ाई पर विराम लगाने के प्रयासों के बावजूद, हालात बद से बदतर हो रहे हैं, और आम नागरिक इस लड़ाई का ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि सीरिया में क़रीब एक वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन के पतन के बाद, मौजूदा संक्रमणकालीन सरकार के सुरक्षा बलों और कुर्द मिलिशिया के लड़ाकों के बीच झड़पें हो रही हैं. समाचार माध्यमों के अनुसार, इन मिलिशिया को केन्द्रीय प्रशासन के अन्तर्गत लाए जाने की कोशिशों पर मतभेदों की वजह से यह लड़ाई भड़की है. 

शहर में व्याप्त असुरक्षा के बीच हज़ारों आम लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर हुए हैं और शहर के मुख्य सड़क मार्गों पर आवाजाही सीमित है, जिससे मानवीय सहायता प्रयासों पर असर हुआ है.

यूएन प्रवक्ता ने ज़ोर देकर कहा कि सभी पक्षों को अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पालन करना होगा, और आम लोगों व नागरिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी. स्तेफ़ान दुजैरिक ने टकराव में कमी लाने, संयम बरतने और आम लोगों की सुरक्षा के लिए ठोस क़दम उठाए जाने की अपील की है.

यूएन ने सभी पक्षों से लचीले रुख़ व सदभाव का परिचय देने का आग्रह किया है, ताकि पिछले वर्ष 10 मार्च को संक्रमणकालीन सरकार और कुर्द मिलिशिया के बीच हुए समझौते को पूर्ण रूप से लागू किया जा सके. 

स्थाई युद्धविराम को लागू किए जाने और एकीकृत सैन्य व सुरक्षा बलों के गठन के लिए यह आवश्यक बताया गया है.

युगांडा: विरोधी दलों व नागरिक समाज के दमन पर चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र ने युगांडा में 15 जनवरी के लिए निर्धारित चुनावों से ठीक पहले, देश में दमनपूर्ण कार्रवाई, नागरिक समाज के लिए सिकुड़ते स्थान और लोगों को डराए-धमकाए जाने की घटनाओं पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया है.

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने शुक्रवार को जारी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि 2021 में हुए चुनावों के बाद से, स्थानीय प्रशासन ने ऐसे क़ानून लागू या उनमें संशोधन किया है, जिनसे राजनैतिक विरोधियों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और असहमति जताने वाले लोगों को दबाए जाने की कोशिशें हो रही हैं. ऐसे मामलों में दंडमुक्ति की भावना भी व्याप्त है.

उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने युगांडा प्रशासन से आग्रह किया है कि यह ज़रूरी है कि तयशुदा अन्तरराष्ट्रीय दायित्वों को निभाया जाए और सभी नागरिक आज़ादी व सुरक्षा के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें.

यूएन कार्यालय ने विरोधी नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने, उनकी गिरफ़्तारियों, विरोधी दलों के कार्यालयों पर छापेमारी, सम्पत्तियों की ज़ब्त करने, रेडियो स्टेशन में प्रसारण रोकने, ब्लॉगर को गिरफ़्तार किए जाने और ग़ैर-सरकारी संगठनों पर सख़्त नियंत्रण के मामलों पर जानकारी जुटाई है. 

रिपोर्ट दर्शाती है कि शान्तिपूर्ण सभाओं को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की और बिना पहचान की गाड़ियों में विरोधी दलों के समर्थकों को अगवा किए जाने के मामले भी सामने आए.

OHCHR ने ज़ोर देकर कहा है कि चुनाव-सम्बन्धी, मानवाधिकार के सभी उल्लंघन मामलों की जाँच कराए जाने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाए जाने की आवश्यकता है.

Source: UN News Hindi

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