ग़ाज़ा संकट अब भी भयावह, बच्चों पर भीषण मुसीबतें

मानवीय सहायता आपूर्ति में वृद्धि के बावजूद, ग़ाज़ा में स्थिति अब भी भयावह बनी हुई है, जिसमें बच्चों को, आश्रय सामग्री, बुनियादी सेवाओं और शिक्षा की कमी के कारण, भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने मंगलवार को न्यूयॉर्क स्थित मुख्यालय में नियमित प्रैस वार्ता में, पूरे ग़ाज़ा पट्टी क्षेत्र की स्थिति को, अब भी लाखों परिवारों के लिए भयावह क़रार दिया, जहाँ इन लोगों को मदद की सख़्त ज़रूरत है.

प्रवक्ता ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के साझीदारों ने, हाल के दिनों में बुनियादी सेवाओं का विस्तार किया है. 

पिछले सप्ताह एक टीकाकरण अभियान भी चलाया गया जिसके दौरान, 3 वर्ष से कम आयु के 6 हज़ार से अधिक बच्चों को, रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बचाने वाली वैक्सीन के टीके लगाए गए.

यूएन और उसकी साझीदार सहायता एजेंसियाँ, लगभग 43 प्रतिशत आबादी को, दैनिक ज़रूरतों के लिए ब्रैड मुहैया करा रहे हैं. यह ब्रैड या तो बिल्कुल मुफ़्त या फिर बहुत सस्ते दामों पर उपलब्ध कराई जा रही है जिसमें दो किलोग्राम ब्रैड का दाम केवल $1 होता है.

साथ ही, परिवारों को महीने भर की खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है जिसके तहत इस महीने 12 लाख लोगों तक पहुँच बनाई गई है.

आश्रय सामग्री की उपलब्धता और सर्दी के मौसम में ठंड से बचाने के लिए सहायता में भी वृद्धि हुई है. 

मानवीय सहायता साझीदारों ने, बीते सप्ताह के दौरान साढ़े 7 हज़ार से अधिक परिवारों को टैंट, तम्बू, गद्दे और कम्बल इत्यादि मुहैया कराए हैं, जबकि 1,400 बच्चों को सर्दियों के मौसम की ठंड से बचाने वाले कपड़े मुहैया कराए गए हैं.

यूएन प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने बताया कि अब भी दस लाख से अधिक लोगों को, आपात स्तर पर आश्रय सामग्री की आवश्यकता है. साथ ही, युद्ध में ध्वस्त हुईं इमारतों का मलबा और कूड़ा-करकट हटाने के लिए भारी उपकरणों के साथ-साथ सामुदायिक स्थानों पर गर्माहट रखने वाले सामान की भी सख़्त ज़रूरत है.

एक पूरी पीढ़ी पर जोखिम

यूएन बाल सहायता एजेंसी – UNICEF का कहना है कि बच्चों पर सबसे अधिक मुसीबतें टूट रही हैं. युद्ध ने शिक्षा में कई वर्षों की प्रगति को ख़त्म कर दिया है.

यूनीसेफ़ के प्रवक्ता जेम्स ऐल्डर ने कहा कि ग़ाज़ा पर लगभग ढाई वर्षों तक चले हमलों ने एक पूरी पूढ़ी को जोखिम में धकेल दिया है.

स्कूली शिक्षा की आयु के लगभग 60 प्रतिशत बच्चों को, व्यक्तिगत रूप में शिक्षा हासिल करने की सुविधा हासिल नहीं है, और 90 प्रतिशत से अधिक स्कूलों को या तो भारी नुक़सान पहुँचा है या व पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं.

यूनीसेफ बच्चों को स्कूली शिक्षा मुहैया कराने के लिए अपने कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है जिसमें इस वर्ष 3 लाख 36 हज़ार बच्चों के लिए अस्थाई शिक्षा केन्द्र बनाए जाएंगे. इन केन्द्रों में बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता सेवाएँ भी मुहैया कराई जाएंगी.

जेम्स ऐल्डर ने रफ़ाह सीमा चौकी खोले जाने की तत्काल ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया और इस सीमा चौकी को, बेहतर चिकित्सा की ख़ातिर मरीज़ों व घायलों को अन्यत्र स्थानों पर पहुँचाए जाने, परिवारों के मिलन और अनिवार्य सेवाओं के लिए भी, जीवनरेखा बताया है.

Source : UN News

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