रमज़ान में रोज़े के दौरान खुशबू और सुरमा: क्या टूटता है रोज़ा?

रमज़ान का मुकद्दस महीना शुरू होते ही इबादत के साथ कई फिक़्ही सवाल भी सामने आने लगते हैं। इनमें सबसे आम सवाल यह है कि क्या रोज़े की हालत में खुशबू (इत्र), सुरमा या काजल लगाना जायज़ है? और क्या ऐसा करने से रोज़ा टूट जाता है?

हदीसों की रौशनी में इसका जवाब साफ़ है, रोज़े की हालत में खुशबू और सुरमा लगाना जायज़ है और इससे रोज़ा नहीं टूटता। बल्कि कई रिवायतों से यह अमल सुन्नत साबित होता है।

खुशबू: नबी करीम की पसंद

अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को खुशबू बेहद पसंद थी। हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: “तुम्हारी दुनिया में से मुझे औरतें और खुशबू पसंद है और मेरी आंखों की ठंडक नमाज़ में रखी गई है।”
(सुनन नसाई : 3939)

एक और हदीस में आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: “जब तुममें से किसी को खुशबू पेश की जाए तो उसे रद्द न करो, क्योंकि यह उठाने में हल्की और महक में उम्दा है।” (सहीह मुस्लिम : 5883)

हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु की एक रिवायत के मुताबिक़, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खुशबू के तोहफे को कभी वापस नहीं करते थे।(सहीह बुख़ारी : 2582)

इसके अलावा जुमे के दिन ग़ुस्ल कर खुशबू लगाने की फज़ीलत भी बयान की गई है। (सहीह बुख़ारी : 883)

रिवायतों में यह भी आता है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़ात मुबारक खुद इतनी खुशबूदार थी कि मुश्क और अंबर से बढ़कर कोई महक महसूस नहीं की गई। (सहीह बुख़ारी : 3561, सहीह मुस्लिम : 2330)

अहम बात: रोज़े की हालत में इत्र लगाना रोज़ा नहीं तोड़ता। हालांकि अगर खुशबू अगरबत्ती या लोबान के धुएँ की शक्ल में हो, तो उसे जानबूझकर नाक या मुंह के जरिए अंदर खींचने से बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से रोज़ा मकरूह हो सकता है।

सुरमा: रोज़े में भी सुन्नत

खुशबू की तरह सुरमा लगाना भी सुन्नत अमल है। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है: “अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमज़ान में रोज़े की हालत में आँखों में सुरमा लगाया करते थे।” (सुनन इब्न माजा : 1678)

हज़रत इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: “तुम्हें इस्मिद (सुरमा) इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि यह आँखों की रौशनी को तेज़ करता है और पलकों के बालों को घना करता है।” (सुनन इब्न माजा : 3496)

रिवायतों के मुताबिक़ आप हर रात सोने से पहले तीन मर्तबा इस्मिद सुरमा लगाया करते थे। (मुस्तदरक हाकिम : 8249)

एक अन्य रिवायत में है कि आप दाईं आँख में तीन और बाईं आँख में दो सलाइयाँ सुरमा लगाते थे। (इब्न अबी शायबाह : 23953)

सुरमा लगाने का सुन्नत तरीका

रात में सोने से पहले सुरमा लगाना बेहतर माना गया है। “बिस्मिल्लाह” पढ़कर यह दुआ पढ़ी जाती है— की “अल्लाहुम्मा मत्तिअनी बिस समी वल बसरी” यानी: ऐ अल्लाह! मुझे सुनने और देखने में फायदा अता फरमा।

इसके बाद दाईं आंख में तीन और बाईं आंख में दो बार सुरमा लगाया जाता है। सलाई को आंख की निचली पलक की भीतरी सतह पर अंदर से बाहर की ओर फेरा जाता है।

सुन्नत के मुताबिक़ इस्मिद सुरमा सबसे बेहतर है। यह खास पत्थर से तैयार होता है, जो पश्चिमी सऊदी अरब के हिजाज़ इलाके और ईरान के इस्फ़हान के पहाड़ों में पाया जाता है।

निष्कर्ष

रमज़ान में रोज़े की हालत में: खुशबू लगाना जायज़ है और सुरमा लगाना सुन्नत है, इनसे रोज़ा नहीं टूटता | हदीसों के स्पष्ट हवाले इस बात की तस्दीक करते हैं कि इन अमलों से रोज़े पर कोई असर नहीं पड़ता, बल्कि यह सुन्नत के दायरे में आते हैं।

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