घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने पर हाई कोर्ट सख्त, बरेली के मुस्लिम व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा का आदेश

Allahabad High Court ने बरेली में एक मुस्लिम व्यक्ति को उसके ही घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने हसीन खान नाम के व्यक्ति को 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश दिया है और कहा है कि जब तक अगला आदेश न आए, उनके साथ दो सशस्त्र सुरक्षाकर्मी हर समय मौजूद रहेंगे।

यह आदेश न्यायमूर्ति Siddharth Nandan और न्यायमूर्ति Atul Sreedharan की पीठ ने सुनवाई के दौरान दिया। हसीन खान ने अदालत से अपनी, अपने परिवार और अपनी संपत्ति की सुरक्षा की मांग की थी।

यह मामला तारिक खान की याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने रमज़ान के दौरान अपनी निजी संपत्ति पर नमाज़ पढ़ने की अनुमति मांगी थी। सुनवाई के दौरान हसीन खान ने अदालत को बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, वह अपने घर में परिवार के साथ नमाज़ पढ़ रहे थे। उसी दौरान पुलिस उन्हें वहां से ले गई और उनके खिलाफ चालान कर दिया।

हसीन खान ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें अदालत में एक खास तरीके से बयान देने के लिए दबाव डाला। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने वैसा बयान नहीं दिया, तो उनके घर पर बुलडोज़र चलाने की धमकी दी गई।

अदालत ने इस मामले में बरेली के जिला मजिस्ट्रेट Avinash Singh और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Anurag Arya को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर दोनों अधिकारी पेश नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जा सकता है।

मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी। अदालत ने यह भी कहा कि यदि हसीन खान या उनकी संपत्ति के साथ कोई हिंसक घटना होती है, तो पहली नजर में इसकी जिम्मेदारी राज्य पर मानी जा सकती है।

इससे पहले फरवरी में भी अदालत ने मोहम्मदगंज गांव में निजी घर के अंदर नमाज़ पढ़ने से मुसलमानों को रोकने के आरोप में जिला प्रशासन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया था।

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