फैक्ट चेक: वाराणसी का 2022 का वीडियो पश्चिम बंगाल चुनाव से जोड़कर किया गया वायरल, दावा भ्रामक

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है, जिसमें कुछ लोग एक शख्स की पिटाई करते दिखाई दे रहे हैं। यूजर्स इस वीडियो को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का बताते हुए दावा कर रहे हैं कि नजरूल इस्लाम नाम का व्यक्ति हिन्दुओं को धमका रहा था कि अगर उन्होंने बीजेपी को वोट दिया तो उन्हें राज्य में रहने नहीं दिया जाएगा। इसके बाद कथित तौर पर कुछ लोगों ने उसकी पिटाई कर दी।

इस वीडियो को साझा करते हुए दीपक शर्मा नामक यूजर ने लिखा,
मुर्शिदाबाद में नजरुल इस्लाम पेल दिए गए. इस्लाम हिन्दुओं को धमकी देने गया था कि भाजपा को vote किया तो प. बंगाल में रह नहीं पाओगे…. बस फिर क्या था… कुछ मर्द निकले और हिज़ड़े को पेल पाल के नेपाल बना दिया।

इसके अलावा  ओसियन जैनजनार्दन मिश्रासरपंच मिका गिलमनीषा चौधरी और अरुण शर्मा सहित कई अन्य यूजर्स ने भी इसी दावे के साथ वीडियो को शेयर किया।

फैक्ट चेक

Times Headline की जांच में सामने आया कि वायरल दावा पूरी तरह भ्रामक है। यह वीडियो पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी का है और वर्ष 2022 का पुराना वीडियो है।

हमारी टीम की जाँच में यह वीडियो 17 जून 2022 को अपलोड किए गए  NBT UP-Uttarakhand के यूट्यूब वीडियो में मिला। वीडियो के कैप्शन में स्पष्ट लिखा है— ‘Agnipath Scheme Protest: Varanasi में बाजार बंद करा रहे थे ‘Agniveer’, दुकानदारों ने जमकर की धुनाई।

वीडियो में दिखाई दे रहे एक बोर्ड पर ‘टेलीफोन कॉलोनी, नगर निगम-वाराणसी’ लिखा भी साफ नजर आता है, जो इसकी लोकेशन की पुष्टि करता है।

आगे की पड़ताल में वीडियो में ‘डबल बुल’ नाम का बोर्ड और उसके पास मौजूद खाली मैदान व आसपास के घरों को गूगल मैप पर भी मिलान किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह स्थान वाराणसी का ही है।

इसके अलावा इस घटना को लेकर अमर उजालाजी बिहार-झारखंड और नवभारत टाइम्स  जैसी मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स भी सामने आईं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान कुछ लोग बाजार बंद कराने की कोशिश कर रहे थे, जिस पर स्थानीय दुकानदारों ने विरोध जताते हुए उन्हें पकड़ लिया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया।

स्थानीय पत्रकार आशीष कुमार ने भी पुष्टि की कि यह वीडियो वाराणसी की पुरानी घटना से जुड़ा हुआ है।

निष्कर्ष:


Times के फैक्ट चेक से साफ है कि वायरल वीडियो का पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद या वहां के चुनाव से कोई संबंध नहीं है। यह 2022 में वाराणसी में अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान हुई घटना का वीडियो है, जिसे गलत दावे और सांप्रदायिक रंग देकर सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है।

ऐसे में यूजर्स का दावा पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन है।

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