ग़ाज़ा: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अनुबन्धित कर्मचारी की मौत पर जताया दुख

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी (WHO) ने ग़ाज़ा पट्टी में संगठन को सेवाएँ प्रदान करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मचारी के एक घटना में मारे जाने की पुष्टि की है और इस घटना पर गहरा दुख प्रकट किया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म, X, पर अपने सन्देश में बताया है कि संगठन के साथ एक अनुबन्ध के तहत सेवारत एक व्यक्ति की सुरक्षा सम्बन्धी घटना में जान चली गई. 

इस घटना के दौरान, WHO के दो कर्मचारी भी उपस्थित थे लेकिन वे घायल नहीं हुए हैं. सोमवार को हुई इस घटना के बारे में अधिक जानकारी फ़िलहाल नहीं मिल पाई है, लेकिन यूएन एजेंसी महानिदेशक के अनुसार, जाँच शुरू कर दी गई है.

यूएन स्वास्थ्य संगठन ने मृतक के परिजन, प्रियजन और सहकर्मियों के प्रति अपनी गहरी सम्वेदना प्रकट की है. 

इस घटना के बाद, WHO ने ग़ाज़ा के अस्पतालों में भर्ती और बेहतर उपचार के लिए अन्य देश भेजे जाने की प्रतीक्षा कर रहे मरीज़ों को रफ़ाह सीमा चौकी के ज़रिए मिस्र ले जाने के प्रयासों को फ़िलहाल स्थगित कर दिया है.

कुछ सप्ताह पहले, रफ़ाह चौकी के फिर आंशिक तौर पर खुलने से कुछ संख्या में फ़लस्तीनियों को ग़ाज़ा पट्टी से बाहर जाने और वापिस लौटने की अनुमति मिली थी, जिनमें गम्भीर रूप से बीमार मरीज़ भी थे. 

महानिदेशक घेबरेयेसस ने अपने उन सहकर्मियों के प्रति गहरा आभार प्रकट किया है, जो अनगिनत जोखिमों के बावजूद ग़ाज़ा में लोगों तक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ पहुँचाने के लिए दिन-रात प्रयासों में जुटे हैं.

“हम आम नागरिकों और मानवीय सहायता कर्मचारियों के संरक्षण का आग्रह करते हैं. शान्ति, सर्वोत्तम औषधि है.”

ईंधन की क़िल्लत

इस बीच, ग़ाज़ा में ईंधन और खाना पकाने के लिए ज़रूरी सामान का मिल पाना कठिन होता जा रहा है. वहीं, बढ़ती क़िल्लत की वजह से अति-आवश्यक सामान की क़ीमतें आसमान छू रही हैं.

फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) ने क्षोभ जताया है कि कई महीनों तक जारी रहे विध्वंस और विस्थापन के बाद, यहाँ रसोइयों में अब पहले जैसी स्थिति नहीं है.

अब यहाँ खाना पकाने के लिए घर में ही बनाए गए चूल्हों का इस्तेमाल होता है, जिन्हें जलाने के लिए टूटी हुई लकड़ियों, या अन्य ज्वलनशील पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा है. 

महिलाएँ, भोजन तैयार करने में संघर्ष कर रही हैं और अक्सर उन्हें गहरे धुँए में खाना पकाना पड़ता है, जोकि उनकी साँस के साथ शरीर में प्रवेश करता है, जोकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

ग़ाज़ा में एक स्थानीय महिला ने बताया कि अपने बच्चों का पेट भरने के लिए उनके पास खुले में आग जलाकर खाना पकाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है. मगर, इस वजह से उन्हें हर दिन जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है.

UNRWA के अनुसार, ग़ाज़ा में वर्तमान हालात की वजह से महिलाओं व लड़कियों पर होने वाला शारीरिक व मनोवैज्ञानिक असर, हर दिन बीतने के साथ बढ़ता जा रहा है और फ़िलहाल इसका कोई अन्त नज़र नहीं आ रहा है.

Source : UN News

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