फिलिस्तीनी जर्नलिस्ट्स सिंडिकेट की ताज़ा रिपोर्ट ने प्रेस स्वतंत्रता पर मंडरा रहे खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में इज़राइली बलों द्वारा पत्रकारों के खिलाफ कुल 53 उल्लंघन दर्ज किए गए! जिसे सिंडिकेट ने एक सुनियोजित और लगातार तेज़ होती कार्रवाई करार दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान दो पत्रकारों की मौत ने स्थिति की गंभीरता को और गहरा कर दिया। गाज़ा में क़तर रेडियो की संवाददाता अमल अल-शामाली उस वक्त मारी गईं जब उनके टेंट को निशाना बनाकर हमला किया गया। वहीं, फिलिस्तीनी ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन से जुड़े मीडिया कर्मी मरवान हरज़ल्लाह की मौत इज़राइली हिरासत में कथित यातना और चिकित्सा लापरवाही के कारण हुई।
सिर्फ मौत ही नहीं, बल्कि पत्रकारों के काम में व्यवस्थित बाधाएं भी सामने आईं। 12 मामलों में उन्हें हिरासत में लिया गया या उनकी रिपोर्टिंग को रोका गया। आठ घटनाओं में आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल कर सीधे निशाना बनाया गया, जबकि आठ मामलों में शारीरिक हमले किए गए।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि सात बार पत्रकारों के उपकरण जब्त या नष्ट किए गए। इसके अलावा छह गिरफ्तारियां, चार घरों पर छापे, और कई मौकों पर मौखिक धमकियां, पूछताछ, भारी जमानत थोपना और हथियारों के जरिए डराने जैसी घटनाएं भी दर्ज की गईं।
सिंडिकेट की फ्रीडम कमेटी ने चेतावनी दी है कि पत्रकारों को निशाना बनाने की ये घटनाएं एक खतरनाक प्रवृत्ति का संकेत हैं, जिनका उद्देश्य जमीनी हकीकत को दुनिया तक पहुंचने से रोकना है।
संगठन ने इन कार्रवाइयों को जिनेवा कन्वेंशन्स और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही, स्वतंत्र जांच शुरू कर दोषियों को जवाबदेह ठहराने की अपील भी की गई है।
रिपोर्ट के अंत में वैश्विक मीडिया संस्थानों से अपील की गई है कि वे इन घटनाओं को प्रमुखता से उठाएं। सिंडिकेट ने स्पष्ट किया कि तमाम मुश्किलों के बावजूद फिलिस्तीनी पत्रकार सच्चाई सामने लाने के अपने मिशन से पीछे नहीं हटेंगे।
