संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता एजेंसियों ने आगाह किया है कि ग़ाज़ा में हिंसा जारी रहने, चूहों का प्रकोप बढ़ने और संक्रामक बीमारियों के फैलाव से चिन्ताजनक हालात हैं, और अति-आवश्यक मेडिकल सामान की आपूर्ति में अवरोध से स्थिति और बिगड़ती जा रही है.
क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़े में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रतिनिधि डॉक्टर रेने वान डे वीर्ड्ट हाल ही में ग़ाज़ा के दौरे से वापिस लौटी हैं और उन्होंने बताया कि जैसी स्थिति वहाँ है, उसे देख पाने के लिए कुछ भी आपको तैयार नहीं कर सकता है.
“मैंने सोचा कि दूसरी बार जाने से यह थोड़ा सरल हो जाएगा, लेकिन ऐसा होता नहीं है.”
डॉक्टर वान डे वीर्ड्ट ने कहा कि अक्टूबर 2025 में, इसराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में संघर्षविराम लागू होने के बाद से अब तक, ग़ाज़ा पट्टी में कम से कम 880 लोग मारे जा चुके हैं और 2,600 से अधिक घायल हुए हैं.
“शायद वहाँ पहले से कम है, लेकिन हिंसा जारी है…हम अपने पास बम धमाके सुनते हैं. वहाँ हर दिन गोलीबारी होती है.”
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रतिनिधि ने ग़ाज़ा में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर क्षोभ व्यक्त किया. इस वर्ष, ग़ाज़ा में स्वास्थ्य सेवाओं पर 22 हमले हुए हैं और आधे से अधिक अस्पतालों में ही आंशिक रूप से ही सेवाएँ मिल पा रही हैं. एक भी अस्पताल अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार संचालित नहीं है.
इसकी एक बड़ी वजह, स्वास्थ्य केन्द्रों में मेडिकल सामान की गम्भीर क़िल्लत है, जिन्हें सीमा के दूसरी ओर रोक कर रखा गया है, और इसके फ़लस्तीनी आबादी पर भयावह असर हो रहे हैं.
बीमारियों का प्रकोप
उन्होंने बताया कि हम हंटावायरस, इबोला के बारे में बात कर रहे हैं. यह कोई विलासिता नहीं है. ये ऐसे उपकरण हैं, जिनकी हमें ज़िन्दगियों को बचाने, बीमारियों का पता लगाने और दुनिया में संक्रमणों के प्रकोप की चेतावनी देने के लिए ज़रूरत है. और यह सुनिश्चित करने के लिए कि लोगों की मौतें न हों.
डॉक्टर वान डे वीर्ड्ट ने कहा कि इसराइली नियमों के तहत, कुछ सामान पर सैन्य उद्देश्यों के लिए दोहरे इस्तेमाल का सन्देह होने की वजह से पाबन्दी है. जैसेकि माना जाता है कि कृत्रिम अंगों का दोहरा इस्तेमाल हो सकता है.
ग़ाज़ा में 5 हज़ार से अधिक अपंगता की अवस्था में जीवन गुज़ार रहे लोगों को न केवल इन अंगों की आवश्यकता है लेकिन सही सर्जरी की भी ताकि उन्हे ठीक से लगाया जा सके, मगर ग़ाज़ा में फ़िलहाल ये सर्जरी नहीं हो सकती है.
“इसलिए, दुर्भाग्य झेल रहे ये लोग यहाँ से बाहर जाने के लिए एक लम्बी प्रतीक्षा सूची में हैं.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने, बेहतर इलाज के लिए ग़ाज़ा से मरीज़ों को 30 से अधिक देशों में ले जाने की प्रक्रिया में समर्थन मुहैया कराया है. फ़रवरी में, रफ़ाह सीमा चौकी इसके लिए एक अहम रास्ता है, जहाँ से मरीज़ फिर मिस्र पहुँचते हैं.
वहीं केरेम शलोम सीमा चौकी के मार्ग से सप्ताह में एक बार, मरीज़ एक लम्बी व जटिल प्रक्रिया से गुज़रने के बाद जॉर्डन जा सकते हैं.
UNRWA का स्थान लेना सम्भव नहीं
डॉक्टर वान डे वीर्ड्ट ने ज़ोर देकर कहा कि फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए यूएन एजेंसी (UNRWA) जिस तरह से सेवारत है, उसका स्थान कोई अन्य नहीं ले सकता है.
यूएन एजेंसी में स्वास्थ्य मामलों की निदेशक डॉक्टर अकिहिरो सेइट ने कहा कि इसराइली संसद में UNRWA के विरुद्ध लाए गए विधेयकों की वजह से, संगठन ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में दवाएँ नहीं भेज पा रहा है.
इस वर्ष की शुरुआत में, पूर्वी येरूशलम में यूएन एजेंसी के दो स्वास्थ्य केन्द्र भी ठप हो गए थे, जहाँ हर साल 11 हज़ार लोगों को सेवाएँ मुहैया कराई जाती थीं.
UNRWA अधिकारी ने बताया कि ग़ाज़ा युद्ध में उसके 400 से अधिक कर्मचारी मारे गए हैं, हज़ारों अन्य अब भी हताश ग़ाजावासियों को भयावह परिस्थितियों में मदद पहुँचा रहे है.
उन्होंने कहा कि हमारे बहुत से कर्मचारी अब भी टैंट में रहते हैं. “एक कर्मचारी ने मुझे जो बताया वो मैं कभी नहीं भूल पाउंगी…’मुझे लगता है कि मैं दुनिया का अनाथ बन गया हूँ. हमारा कोई ख़्याल नहीं रख रहा है. उन्होंने हमें भुला दिया है.”
Source : UN News
