संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को एक नए शान्ति समझौते पर सहमति की घोषणा का स्वागत किया है और इसे हिंसक टकराव की समाप्ति और आपसी सुलह की राह में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है.
यूएन महासचिव के प्रवक्ता की ओर से जारी एक वक्तव्य के अनुसार, यह सहमति तत्काल व स्थाई युद्धविराम को अमल में लाने, होर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग को फिर से खोलने और वार्ता को आगे बढ़ाने का फ़्रेमवर्क प्रदान करती है.
यूएन प्रमुख ने समझौते के लिए वार्ता के समर्थन में पाकिस्तान, क़तर, मिस्र, सऊदी अरब, तुर्कीये और अन्य क्षेत्रीय देशों द्वारा निभाई गई भूमिका की गहरी सराहना की है.
उन्होंने उम्मीद जताई है कि सभी पक्ष इस सहमति की बुनियाद पर आगे बढ़ेंगे और अन्तिम समझौते को हासिल करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करेंगे.
महासचिव गुटेरेश ने भरोसा दिलाया है कि संयुक्त राष्ट्र, स्थाई और व्यापक शान्ति को हासिल करने की दिशा में हो रहे प्रयासों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है.
28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर बमबारी शुरू की थी, जिसके बाद ईरान ने जवाबी ड्रोन व मिसाइल हमले किए और इसराइल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में स्थित देशों को निशाना बनाया. इसके बाद से पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र एक गहरे संकट में धँस गया था.
इस टकराव के दौरान, फ़ारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाले होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर जहाज़ों की आवाजाही ठप हो गई, जिससे बड़े पैमाने पर तेल, गैस, उर्वरक व अन्य सामान की आपूर्ति पर गहरा असर हुआ.
यह समुद्री मार्ग तेल व द्रव्यीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इस व्यवधान की वजह से अनेक देशों में अर्थव्यवस्था पर भीषण असर हुआ था और महंगाई उछाल पर थी.
दोनों देशों में अप्रैल में युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन उसके बावजूद रुक-रुककर दोनों पक्षों द्वारा हमले किए जाते रहे और इस सप्ताह भी ये हमले किए गए.
बेरूत पर हमले की निन्दा
इससे पहले, यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने एक अन्य वक्तव्य में रविवार को इसराइल द्वारा बेरूत पर किए गए हवाई हमले की निन्दा की.
उन्होंने क्षोभ व्यक्त किया कि युद्धविराम के बावजूद यह हमला किया गया, एक ऐसे समय में जब अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने की सम्भावना है.
यूएन प्रमुख ने चेतावनी दी थी कि हिंसक टकराव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भयावह असर हो रहा है और इस अहम क्षण में सभी पक्षों को अधिकतम संयम बरतना होगा.
लेबनान में हालिया संकट, मध्य पूर्व में भड़की अशान्ति का ही नतीजा है. ईरान पर अमेरिका व इसराइल के हमलों के बाद, हिज़बुल्लाह ने ईरान के समर्थन में इसराइल पर रॉकेट हमले किए थे, जिसके बाद इसराइल ने बड़े पैमाने पर लेबनान में सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, जोकि लाखों लोगों के विस्थापित होने और सैकड़ों के हताहत होने की वजह बनी.
संघर्षविराम पर सहमति होने के बावजूद, इसराइली सेना और हिज़बुल्लाह के बीच टकराव और हिंसा की घटनाएँ हुई हैं.\
Source : UN News
