शब्बीर अहमद की वापसी पर ब्रिटेन-पाकिस्तान में बढ़ा विवाद, विपक्ष ने सहायता और वीजा रोकने की मांग की

लंदन: ब्रिटेन में बच्चों के यौन शोषण के गंभीर मामलों में दोषी ठहराए गए पाकिस्तानी मूल के शब्बीर अहमद को पाकिस्तान वापस भेजने का मुद्दा अब राजनीतिक विवाद में बदल गया है। पाकिस्तान ने अहमद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद ब्रिटेन के विपक्षी दलों ने मांग की है कि जब तक पाकिस्तान ऐसे दोषियों को वापस स्वीकार नहीं करता, तब तक उसे दी जाने वाली विदेशी सहायता रोक दी जाए और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए नए वीजा जारी करने पर भी प्रतिबंध लगाया जाए। इस विवाद के बीच ब्रिटेन सरकार द्वारा पाकिस्तान के लिए 153 मिलियन पाउंड की विकास सहायता मंजूर किए जाने ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

शब्बीर अहमद पाकिस्तानी मूल का नागरिक है और रोशडेल गैंग के प्रमुख सदस्यों में शामिल था। 2000 के दशक में ग्रेटर मैनचेस्टर के रोशडेल इलाके में ब्रिटिश लड़कियों के यौन शोषण के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था। बच्चों से बलात्कार के 30 मामलों में दोषी पाए जाने के बाद उसे 22 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। उसने 14 साल जेल में बिताए और इसी महीने की शुरुआत में उसे रिहा कर दिया गया।

ब्रिटेन ने 2016 में अहमद की ब्रिटिश नागरिकता समाप्त कर दी थी। हालांकि, उसे पाकिस्तान निर्वासित करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने अब संकेत दिया है कि बेहद गंभीर मामलों में निर्वासन से जुड़ी मौजूदा कानूनी व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है।

लेकिन अहमद की पाकिस्तान वापसी पर सबसे बड़ी अड़चन उसकी नागरिकता को लेकर है। पाकिस्तान का कहना है कि अहमद ने कई दशक पहले ही पाकिस्तानी नागरिकता छोड़ दी थी और 30 साल से अधिक समय पहले अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट भी नष्ट कर दिया था। वहीं, ब्रिटिश अधिकारियों का तर्क है कि पासपोर्ट नष्ट कर देने मात्र से उसकी पाकिस्तानी नागरिकता कानूनी तौर पर समाप्त नहीं होती।

मामला तब और गरमा गया जब सामने आया कि ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने अगले तीन वर्षों के दौरान पाकिस्तान को 153 मिलियन पाउंड यानी करीब 206 मिलियन डॉलर की विकास सहायता देने को मंजूरी दी है। विपक्षी दलों ने इसी फैसले को लेकर सरकार पर हमला बोला और पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए सहायता और वीजा रोकने की मांग की।

Reform UK के उपनेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि जब तक पाकिस्तान अहमद को वापस स्वीकार नहीं करता, तब तक उसे विदेशी सहायता और वीजा नहीं दिए जाने चाहिए। पार्टी के गृह मामलों के प्रवक्ता जिया यूसुफ ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की। वहीं, विपक्ष के शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिल्प और शैडो फॉरेन सेक्रेटरी प्रीति पटेल ने भी पाकिस्तान को सहायता रोकने और पाकिस्तानी नागरिकों के लिए नए वीजा पर प्रतिबंध लगाने की मांग का समर्थन किया।

हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने इस सहायता का बचाव किया है। सरकार का कहना है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद का उद्देश्य वहां एक अधिक सुरक्षित और मजबूत व्यवस्था बनाने में सहयोग करना है, जिससे भविष्य में ब्रिटेन के लिए सुरक्षा और प्रवासन से जुड़े जोखिमों को कम करने में भी मदद मिल सके।

दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अहमद को स्वीकार करने की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है। उसका कहना है कि अहमद ब्रिटेन में ही बड़ा हुआ, वहीं उसका पालन-पोषण हुआ और वहीं उसने अपराध किए। इसलिए उसकी जिम्मेदारी ब्रिटेन की है।

शब्बीर अहमद का मामला रोशडेल में सामने आए उन मामलों की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसने ब्रिटेन में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इन मामलों में अधिकारियों पर कमजोर लड़कियों को संगठित यौन शोषण से बचाने और बार-बार मिली शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहने के आरोप लगे थे। एक हालिया रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई बार अधिकारी नस्लवाद के आरोप लगने के डर से हस्तक्षेप करने से पीछे हट गए।

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