पूर्वी यरूशलेम : सिलवान में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सिर्फ एक घर टूटने की कहानी नहीं, बल्कि मजबूरी और सिस्टम के दबाव को दिखाता है।
शनिवार को Israeli Occupation Authority ने मोहम्मद क्वैदेर नाम के शख्स को “बिना परमिट निर्माण” का हवाला देकर अपना ही घर खुद गिराने पर मजबूर कर दिया। यह घर अल अक़्सा मस्जिद के पास अल-बुस्तान इलाके में था, जहां वह 2012 से अपने 6 बच्चों के साथ रह रहे थे। सोचिए, 10 साल से ज्यादा वक्त तक जिस घर में एक परिवार रहता रहा, उसे एक दिन अचानक खुद अपने हाथों से मिटाना पड़े…
मामला यहीं खत्म नहीं होता। आपको बता दे की यरूशलेम गवर्नरेट के अनुसार, परिवार पर 60,000 शेकेल का जुर्माना भी लगाया गया, जिसमें से 25,000 अभी बाकी है। यानी घर भी गया और कर्ज भी सिर पर।
इसी दिन, सिलवान के रास अल-अमूद इलाके में एक और परिवार अत-तह्हान के तीन भाइयों को भी अपने-अपने घर खुद गिराने पड़े।
ऐसा क्यों हो रहा है?
पूर्वी यरुशलम (East Jerusalem) में अक्सर फिलिस्तीनी परिवारों को दो मुश्किलों में से एक चुननी पड़ती है— या तो खुद घर गिरा दें, या फिर भारी-भरकम जुर्माना और तोड़फोड़ का खर्च झेलें
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे जब भी घर बनाने के लिए परमिट मांगते हैं, तो आवेदन खारिज कर दिया जाता है। ऐसे में बढ़ते परिवारों के लिए बिना परमिट घर बनाना मजबूरी बन जाता है और बाद में वही उनके खिलाफ इस्तेमाल होता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाज़ा वार शुरू होने के बाद से ऐसे घर गिराने की घटनाएं लगभग दोगुनी हो गई हैं।
निष्कर्ष:
यह सिर्फ एक घर का टूटना नहीं, बल्कि एक परिवार का बिखरना है जहां छत भी चली गई और आर्थिक बोझ भी बढ़ गया।
