SIR के बाद से बिहार की वोटर लिस्ट में लगभग 14 लाख वोटर जोड़े गए हैं। इन नए नामों को जोड़ने और उसके बाद की एनरोलमेंट प्रक्रिया ने उन योग्य वोटरों पर ध्यान खींचा है जो 2025 के विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया से छूट गए थे, और साथ ही उनके बाहर रह जाने से वोट देने से वंचित हो गए।
‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) के तहत लाखों नाम हटाए गए थे। इसके बाद के एक साल में बिहार की वोटर लिस्ट में लगभग 14 लाख नए वोटर जोड़े गए हैं। इस बढ़ोतरी ने उन लोगों की ओर फिर से ध्यान खींचा है जिन्हें शायद गलती से लिस्ट से हटा दिया गया था और इस वजह से वे वोट नहीं दे पाए थे।
बिहार में वोटरों की संख्या सितंबर 2025 में लगभग 7.41 करोड़ से बढ़कर अक्टूबर 2026 में 7.55 करोड़ हो गई है। ‘फॉर्म 6’ के जरिए लगभग 18.7 लाख आवेदन मिले, जिनमें से लगभग 14 लाख लोगों का नाम लिस्ट में शामिल किया गया।
नए जुड़े लोगों में पहली बार वोट देने वाले और दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने वाले लोग शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध आंकड़ों से यह पता नहीं चलता कि इनमें से कितने लोग पहले से रजिस्टर्ड थे और बाद में SIR के दौरान हटा दिए गए थे।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले फाइनल वोटर लिस्ट से गलती से हटाए गए किसी भी योग्य वोटर ने नवंबर 2025 में वोट देने का मौका गंवा दिया होगा। अब उनका नाम जोड़ने से वे भविष्य के चुनावों में वोट दे पाएंगे, लेकिन इससे वे उस चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाए जो पहले ही हो चुका है।
SIR के बाद लगभग 47 लाख वोटर कम हुए
जब 24 जून 2025 को SIR शुरू हुआ, तब बिहार में लगभग 7.89 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर थे। 1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट लिस्ट में लगभग 7.24 करोड़ नाम थे, यानी लगभग 65 लाख की कमी आई थी।
दावों और आपत्तियों के समय, 21.53 लाख वोटर जोड़े गए और 3.66 लाख नाम हटा दिए गए। 30 सितंबर को जारी फाइनल लिस्ट में लगभग 7.42 करोड़ वोटर थे, जो इस प्रक्रिया से पहले की तुलना में लगभग 47 लाख कम थे। नवंबर 2025 का विधानसभा चुनाव संशोधित वोटर लिस्ट का इस्तेमाल करके कराया गया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने SIR से जुड़े अपने 27 मई 2026 के फैसले में इन आंकड़ों को दर्ज किया।
चुनाव आयोग का कहना था कि डुप्लीकेट एंट्री, मृत वोटरों और स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों के नाम हटाने के लिए SIR जरूरी था, साथ ही यह भी सुनिश्चित करना था कि सभी योग्य नागरिक रजिस्टर्ड रहें।
